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ॐ ह्रीं मोक्ष कल्याणक प्राप्ताय श्री मुनिसुव्रतनाथ जिनेन्द्राय नमः |

आहारपर्याप्ति

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आहारपर्याप्ति
Food offering with devotion to saints. एक शरीर को छोड़कर दूसरे नवीन शरीर के बिना कारणभूत जिन नोकर्म वर्गणाओं को जीव ग्रहण करता है उनको खलरसभाग परिणमाने की प्र्याप्त नामकर्म के उदय से रहित जीव की शक्ति का पूर्ण हो जाना।