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डिप्लोमा इन जैनोलोजी कोर्स का अध्ययन परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी द्वारा प्रातः 6 बजे से 7 बजे तक प्रतिदिन पारस चैनल के माध्यम से कराया जा रहा है, अतः आप सभी अध्ययन हेतु सुबह 6 से 7 बजे तक पारस चैनल अवश्य देखें|

१८ अप्रैल से २३ अप्रैल तक मांगीतुंगी सिद्धक्ष्रेत्र ऋषभदेव पुरम में इन्द्रध्वज मंडल विधान आयोजित किया गया है |

२५ अप्रैल प्रातः ६:४० से पारस चैनल पर पूज्य श्री ज्ञानमती माताजी के द्वारा षट्खण्डागम ग्रंथ का सार प्रसारित होगा |

इंद्रध्वज विधान

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इंद्रध्वज विधान
A book written by Ganini Gyanmati Mataji related to Pooja-Vidhan (worshipping). गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमति माताजी द्वारा मध्यलोक के 458 आकृत्रिम जिन-चैत्यालयों की पूजन हेतु रचित एक अनुपम कृति (ई.स.1976)। वर्षा के अभाव में इस विधान को करने की प्राचीन परम्परा है। वर्तमान में अपने मनोरथों की सिद्धि हेतु भी लोग इस विधान को करते हैं।