ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर २०१६- रविवार से सीधा प्रसारण चल रहा है | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

इतना गुस्सा क्यों ?

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


[सम्पादन]
इतना गुस्सा क्यों ?

17800291-cute.jpg
17800291-cute.jpg

कई मामलों में गुस्सा होना जायज हो सकता है, पर हम कई बार छोटी—छोटी बातों पर भी गुस्सा हो जाते हैं । उस समय हम यही साबित करना चाहते हैं कि हम सही हैं और किसी भी मुद्द पर हमारी जानकारी दुसरे से बेहतर है। हम सब जानते हैं कि क्रोध करना बुरा है, पर हम सब अपने भावों पर नियंत्रण नहीं रख पाते । मैं अपने आधार पर कह सकता हूँ कि गुस्से के कारण यदि उसके कारण को लिख लिया जाए तो उसे समझ कर गुस्से को नियंत्रण में रखने में मदद् मिलती है। गुस्से से कुछ फायदा हो या न हो , अपना शारीरिक और मानसिक नुकसान जरूर हो जाता है।

प्राय:जब हम बेवजह गुस्सा करते हैं, तो अधिकांश मामलों में हमें बाद में शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। कभी भी आपको लगे कि आपने बेवजह किसी पर अपना गुस्सा उतारा है, तो बाद में आपको उससे माफी मांग लेनी चाहिए। ऐसी स्थिति सबके जीवन में कभी न कभी आती है और ऐसे में मैं तो संबंद्ध व्यक्ति से माफी मांगने में जरा भी संकोच नहीं करता। एक बार मुझे अपने ड्राइवर पर बहुत गुस्सा आया, क्योंकि वह टाइम से स्टेशन नहीं पहुंचा था। बाद में मुझे पता चला कि मेरे परिवार की ओर से ही उसे भ्रामक जानकारी दी गई थी और देर से आने में उसकी कोई गलती नहीं थी। मैंने तुरंत उसे सॉरी कहा।

हर किसी के द्वारा अपने गुस्से पर काबू पाने के लिए किसी न किसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है । मेरा सुझाव है कि गुस्से की स्थिति बनने पर अपना ध्यान कहीं और भी लगाना फायदेमंद होता है। दो—तीन मिनट के लिए भी ऐसा करने पर गुस्से से तीव्रता कम होने लगती हैं पूर्व अमेरिका राष्ट्रपति अब्राहिम लिंकन ने सुझाव दिया था कि जब भी आप गुस्से में हों, तो एक पत्र लिखें और उसमें गुस्से की पूरी कहानी लिख डालें। इससे गुस्से को काबू में रखने में मदद मिलती है।

तेज गुस्से पर बाद में पछतावा करने की बजाय उसे काबू में रखना आपके लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है। इससे आपकी सेहत पर पर विपरीत असर नहीं पड़ता है और साथ ही अन्य लोगों के बीच आपकी छवि को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता। गुस्से की अवस्था में अपना ध्यान किसी और चीज की ओर लगा देना, लेखन करना, चित्रकारी करना, संगीत सुनना आदि से गुस्से की तीव्रता को कम करने में मदद मिलती है।

फिर भी यदि किसी बात से गुस्सा आ ही जाए, तो फौरन कुछ बोलने की बजाय ठंडे दिमाग से सामने वाले को समझाने का प्रयत्न करना चाहिए। गुस्से में कुछ समझाने की बजाय इस तरीके से किसी व्यक्ति को बेहतर ढंग से समझाया जा सकता है।

अहिंसा महाकुभ
१५ जून/ जुलाई, २०१४