ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर २०१६- रविवार से सीधा प्रसारण चल रहा है | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

इन्द्रध्वज विधान

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इन्द्रध्वज विधान के विषय में
प्रकाशक दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर
लेखक गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
पुस्तक के विषय में खतौली (उ.प्र.) के चातुर्मास में श्रावण कृष्णा १, वी. नि. सं. २५०३ से प्रारंभ कर वी. नि. सं. २५०२, कार्तिक कृ. अमावस्या दीपावली पर्व सन् १९७६ में पहली बार स्वतंत्ररूप से इसे

हिन्दी भाषा में पूज्य माताजी द्वारा लिखा गया। तब से सारे देश में इस विधान की धूम मची हुई है। इसमें मध्यलोक के ४५८ अकृत्रिम जिनचैत्यालयों की पूजा है।

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