ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्ज एप पर मेसेज करें|

इन्द्रभूति-

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

इन्द्रभूति-
पूर्व भव में आदित्य विमान में देव थे। यह गौतम गोत्रीय ब्राह्मण थे। वेद पाठी थे। भगवान वीर के समवशरण में मानस्तम्भ देखकर मानभंग हो गया। व 500 शिष्यों के साथ दीक्षा धारण कर ली। तथा सात ऋद्धियाँ प्राप्त हो गयी। भगवान महावीर के प्रथम गणधर थे। आपको नावण कृश्ण एकम् के पूर्वोह काज में श्रुतज्ञान जागृत हुआ। इस तिथि को पूर्व रात्रि में आपने जनो की रचना करने सारे श्रुत को आगम निशद्ध कर दिया।श्रेणीःशब्दकोष