ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर, रविवार से ११ दिसंबर २०१६, रविवार तक प्रातः ६ बजे से ७ बजे तक सीधा प्रसारण होगा | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

इन्हें अवश्य करें

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


[सम्पादन]
इन्हें अवश्य करें

334y.jpg
334y.jpg

१- प्रात: उठकर णमोकार मंत्र पढ़कर पंचपरमेष्ठी का स्मरण करें।

२- तत्पश्चात् माता—पिता के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

३- प्रतिदिन दिनचर्या करके शुद्ध वस्त्र पहनकर चांवल लेकर मन्दिर जी में जिन प्रतिमा के दर्शन करने जायें।

४- मंदिरजी में प्रवेश के पूर्व पैर धोयें एवं मुँह साफ करें।

५- प्रतिदिन किसी भी धर्मशास्त्र या पुराण का १० मिनिट स्वाध्याय अवश्य करें।

६- चमड़े की वस्तुओं का उपयोग न करें।

७- शिष्टाचार रूप में साधर्मियों से मिलने पर ‘जय जिनेन्द्र’ कहकर अभिवादन करें।

८- हित—मित—प्रिय वचनों का व्यवहार करें।

९- सबकी भावनाओं का ध्यान रखें।

१०- हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील, परिग्रह इन पाँच पापों से भयभीत रहें।

११- गरीबों की यथाशक्ति मदद करें।

१२- विपत्ति आने पर भी सत्य का साथ न छोड़े ।

१३- क्रोध शत्रु है, इससे मित्रता नष्ट होती है।

१४- कुसंस्कार या बुरे आचरण करने वालों से दूर रहें।

१५- दूसरों की निंदा / चुगली से बचें।

१६- कक्षा में निश्चित स्थान से उठकर नहीं जायें।

१७- बिना अनुमति कक्षा से उठकर नहीं जायें

१८- दूसरों के अवगुण गिनाकर नीचे दिखाने का प्रयास करना महापाप है।

१९- हमेशा अपने से बड़ों को आप कहकर सम्बोधित करें।

२०- सहपाठियों के साथ विवाद करने से बचें।