ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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इस मंत्र की जाप्य दो दिन 20 और 21 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं शक्तितस्तपो भावनायै नमः"

इन्हें अवश्य करें

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इन्हें अवश्य करें

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१- प्रात: उठकर णमोकार मंत्र पढ़कर पंचपरमेष्ठी का स्मरण करें।

२- तत्पश्चात् माता—पिता के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

३- प्रतिदिन दिनचर्या करके शुद्ध वस्त्र पहनकर चांवल लेकर मन्दिर जी में जिन प्रतिमा के दर्शन करने जायें।

४- मंदिरजी में प्रवेश के पूर्व पैर धोयें एवं मुँह साफ करें।

५- प्रतिदिन किसी भी धर्मशास्त्र या पुराण का १० मिनिट स्वाध्याय अवश्य करें।

६- चमड़े की वस्तुओं का उपयोग न करें।

७- शिष्टाचार रूप में साधर्मियों से मिलने पर ‘जय जिनेन्द्र’ कहकर अभिवादन करें।

८- हित—मित—प्रिय वचनों का व्यवहार करें।

९- सबकी भावनाओं का ध्यान रखें।

१०- हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील, परिग्रह इन पाँच पापों से भयभीत रहें।

११- गरीबों की यथाशक्ति मदद करें।

१२- विपत्ति आने पर भी सत्य का साथ न छोड़े ।

१३- क्रोध शत्रु है, इससे मित्रता नष्ट होती है।

१४- कुसंस्कार या बुरे आचरण करने वालों से दूर रहें।

१५- दूसरों की निंदा / चुगली से बचें।

१६- कक्षा में निश्चित स्थान से उठकर नहीं जायें।

१७- बिना अनुमति कक्षा से उठकर नहीं जायें

१८- दूसरों के अवगुण गिनाकर नीचे दिखाने का प्रयास करना महापाप है।

१९- हमेशा अपने से बड़ों को आप कहकर सम्बोधित करें।

२०- सहपाठियों के साथ विवाद करने से बचें।