ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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इन्हें भी आजमायें

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छोटी छोटी बातों का अगर ध्यान रखेंगे तो कोई घरेलू उपय बहुत कारगर साबित होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि हमारे छोटे हादसे हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में अगर कुछ घरेलू उपायों को अपनायेंगे तो आसानी से इन समस्याओं से निजात मिल जाएगी, इलायची का सेवन आमतौर पर सुख शुद्धि के लिये अथवा मसाले के रूप में किया जाता है। हरि इलायची मिठाईयों की खुशबु बढ़ाती है।

मेहमानों की आवभगत में भी इलायची का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसकी महत्ता केवल यहीं तक सीमित नहीं है। यह औषधीय गुणों की खान है।

दाल का करें इस्तेमाल

यदि खाने के बाद थोड़ी सी दाल बच गयी हो तो उसे फैकने के बजाय आटा गूंधते वक्त उसमें मिला लें, रोटी स्वादिष्ट और पौष्टिक बनेगी।

बरसात के मौसम में जी मिचलाना, सिरदर्द , सांस की बदबू जैसी परेशानियां घेर लेती है, इन सबसे आपको छोटी इलायची निजात दिला सकती है।

महीने में एक बार ग्राइंडर में थोड़ा सा साधारण नमक डालकर उसे चला लें, इससे मिक्सर की ब्लेड में धार बनी रहेगी।

कपूर के चंद टूकड़े, एक कप पानी में डालकर बिस्तर के सिरहाने या घर में कहीं भी रखें, मच्छर नहीं फटकेगे।

आधा नींबू काटकर थोड़ा रस निकाल लें, नखूनों को नींबू में डालकर कुछ देर रगड़े, नींबू हटाकर बेबी टूथब्रुश से मालिश करें पीलापन दूर होगा।

घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिये रोज पोंछा लगाते समय पानी में थोड़ा नमक मिलायें। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव घटता है।

रोज सुबह खाली पेट तुलसी के पांच सात पत्ते खूब चबाकर खायें और ऊपर से तांबे के बर्तन में रात का रखा एक गिलास पानी पियें। इस प्रयोग से बहुत लाभ होता है। यह ध्यान रखें कि तुलसी के पत्तों के कण दांतों के बीच न रह जायें। सुबह खाली पेट चुटकी भर साबुत चावल ताजे पानी के साथ निगलने से यकृत (लीवर) की तकलीपेंâ दूर होती हैं । रोज कम से कम ३० मिनट ध्यान मुद्रा करने से अनिद्रा या अति निद्रा, कमजोर यादशक्ति क्रोधी स्वभाव आदि में अत्यंत लाभ होता है। ध्यान भजन व पढ़ाई लिखाई में मन लगता है।

भोजन के बीच में आंबले का ३०—३५ ग्राम रस पानी में मिलाकर २१ दिन पीने से हृदय और मस्तिष्क खूब मजबूत हो जाता है।

दूध के साथ नमक, दही, लहसुन, मूली, गुड़, तिल, नींबू, केला , पपीता आदि सभी प्रकार के फल, आईस्क्रीम, तुलसीव अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए। यह विरुद्ध आहार है। सूर्यकिरणें सर्वरोगनाशक व स्वास्थ्यप्रदायक है। रोज सुबह सिर को कपड़े से ढ़ककर आठ मिनट सूर्य की ओर मुख व दस मिनट पीठ करके बैंठे ।