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पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ ऋषभदेवपुरम्-मांगीतुंगी में विराजमान है ।

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उन्मत्त :

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उन्मत्त :

होदि कसाउम्मत्तो उम्मत्तो, तह ण पित्तउम्मत्तो
—भगवती आराधना : १३२५

वात, पित्त आदि विकारों से मनुष्य वैसा उन्मत्त नहीं होता, जैसा कि कषायोंन्मत्त ही वस्तुत: उन्मत्त है।