ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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उभयशुद्धि

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उभयशुद्धि
सम्यग्ज्ञान का एक अंग व्यंजन और उसके वाच्य (अर्थ) अभिप्राय की शुद्धि उभयशुद्धि है। अपरनाम तदुभयशुद्धि।