ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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उभयानंत

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उभयानंत
An infraction of repentance (bilaterally). लोक के मध्य में आकाश प्रदेश की पंक्ति को दो दिशाओं में देखने पर उनका अंत नहीं पाया जाता है इसलिये उसे उभयानंत कहते हैं।