ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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ऊँचा सा पहाड़ है, अष्टापद गिरिराज है

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ऊँचा सा पहाड़ है, अष्टापद गिरिराज है

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तर्ज—जिया बेकरार है......
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ऊँचा सा पहाड़ है, अष्टापद गिरिराज है,

ऋषभदेव के मोक्षगमन से, पावन गिरि केलाश है।। टेक.।।
नाभिराय मरुदेवी के नन्दन, तीर्थंकर प्रभु प्रथम हुए।। तीर्थंकर......
राजपाट सब त्याग वनों में, जाकर मुनिवर प्रथम हुए।। जाकर......
मन में हुआ विचार है, नश्वर सब संसार है,
ऋषभदेव के मोक्षगमन से, पावन गिरि केलाश है।।१।।
चौदह दिन की आयु रही जब, अष्टापद पर पहुँच गए। अष्टापद......
योग निरोधा कर्म नष्ट कर, सिद्धालय को प्राप्त हुए।। सिद्धालय......
सुख का वह साम्राज्य है, तीन लोक सरताज है,
ऋषभदेव के मोक्षगमन से, पावन गिरि केलाश है।।२।।
आओ खोज करें उस गिरि की, कहाँ आज वह लुप्त हुआ।। कहाँ......
चक्रवर्ती भरतेश्वर ने जहाँ, रत्नमूर्ति निर्माण किया।। जहाँ......
कहते ग्रन्थ पुराण हैं, इतिहासों में नाम है,
ऋषभदेव के मोक्षगमन से, पावन गिरि केलाश है।।३।।
मिली प्रेरणा ज्ञानमती की, जय जय का स्वर गूँज उठा।। जय जय......
दीप ‘चंदनामती’ असंख्यों, लेकर भक्तसमूह चला।। लेकर......
देखो कैसा ठाठ है, सुन्दर पर्वतराज है,
ऋषभदेव के मोक्षगमन से, पावन गिरि केलाश है।।४।।
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