ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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ऊँचे मेरू पर्वत वाला है, जम्बूद्वीप हमारा

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ऊँचे मेरू पर्वत वाला है, जम्बूद्वीप हमारा।

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तर्ज—ऊँचे ऊँचे शिखरों वाला......

ऊँचे मेरू पर्वत वाला है, जम्बूद्वीप हमारा।
द्वीप हमारा, सारे जग में निराला।। ऊँचे......।। टेक.।।
शास्त्रों में इसकी रचना लिखी थी, केवलज्ञानी को सच में दिखी थी।
गजदंतगिरि से सुहाना है, जम्बूद्वीप हमारा।। ऊँचे मेरू......।।१।।
प्रभु गोमटेश्वर के श्री चरणों में, ज्ञानमती माता के आया था मन में।
उसका ही दर्शन कराता है, जम्बूद्वीप हमारा।। ऊँचे मेरू......।।२।।
गंगा सिन्धू नदियों की धारा, आर्यखंड में है विश्व सारा।
छह कुलपर्वत वाला है, जम्बूद्वीप हमारा।। ऊँचे मेरू......।।३।।
क्षेत्र विदेहों में तीर्थंकर हैं, भरतादि क्षेत्रों में भी मंदिर हैं।
दश कल्पवृक्षों से प्यारा है, जम्बूद्वीप हमारा।। ऊँचे मेरू......।।४।।
मेरू सुदर्शन में चार वन हैं, सोलह जिनालय से युक्त वन हैं।
मणियों की आभा वाला है, जम्बूद्वीप हमारा।। ऊँचे मेरू......।।५।।
पांडुकशिला पर होता न्हवन है, तीर्थंकरों को मेरा नमन है।
लवणोदधीयुत प्यारा है, जम्बूद्वीप हमारा।। ऊँचे मेरू......।।६।।
मेरू को स्वर्णाचल कहते हैं, ऋषिगण वहाँ हर पल रहते हैं।
‘‘चंदनामती’’ यह निराला है, जम्बूद्वीप हमारा।। ऊँचे मेरू......।।७।।

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