ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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ऊर्जाओं का खेल

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ऊर्जाओं का खेल

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अनादिकाल से मानव की इच्छाएं सुखी सम्पन्न होने की थीं, आज भी हैं एवं भविष्य में भी रहेंगी। भारतवर्ष आध्यात्मिक शक्तियां, सामुद्रिक शास्त्र का ज्ञान, वास्तु शिल्प कला, संगीत, चित्रकारी एवं अगणित ज्ञान भंडार का बेताज बादशाह रहा है। परमात्मा, ईश्वर, अल्लाह के चाहने वालों एवं उस पर चलने वालों की अगर फेहरिश्त बनायी जाए, तो फेहरिश्त को पूर्ण करना संभव नहीं होगा। भारतवर्ष के जर्रे—जर्रे से शराफत, इंसानियत, ईमान की चाहत झलकती है। फक्र से यह कहते हैं कि भारत विश्व का आध्यात्मिक गुरु है। आज दूरदर्शन, समाचार पत्रों में वास्तु शास्त्र एवं ज्योतिष ने अपनी पहचान जनमानस के दिल में बना ली है। दूरदर्शन और करीब—करीब सभी चैनलों पर नियमित रूप से विद्वान अपनी—अपनी शैली से जनमानस के कल्याण के लिए चर्चाएं करते हुए मार्गदर्शन देते हैं। शास्त्रों के विद्वानों को अपने ज्ञान के द्वारा विश्व कल्याण के लिए मार्गदर्शन देना एक धर्म में आ जाता है। शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान देता है। शिक्षक का धर्म है ज्ञान देना। कर्तव्य को भी हम धर्म कहते हैं। वास्तु विज्ञान एवं अंक विज्ञान (न्यूमेरोलॉजी) के अध्ययन से मुझे जो प्राप्त हुआ, जन—जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा हूं। उद्देश्य है ऋषि मुनियों का दिखाया हुआ मार्ग। ऋषि मुनियों ने कहा है ‘खुशियां बांटो, खुशियां आयेंगी।’

आज के आर्थिक युग में शास्त्र अनुकूल भूखंड एवं फ्लैट क्रय करना टेढ़ी खीर है। हमारे भ्रमण काल में नित्य इसी तरह के संयोग मिलते हैं। दूषित भूखंड आपके सोच, संस्कार एवं संस्कृति को दूषित करने में सहयोगी बन जाता है। यह सहयोग आज नया नहीं हो रहा है, पहले भी होते थे एवं आगे भी होते रहेंगे । सभी को सुखी सम्पन्न होने की चाहत रहती है। अगर हम प्रकृति , परमात्मा से प्रेरणा लेते हैं, पल—पल प्रगति चाहते हैं, प्रसन्नता प्राप्त करना चाहते हैं। इन सभी चाहतों को पूरा करने में सकारात्मक उर्जाएं सहयोगी बन सकती हैं। वास्तुविद् भूखंड या फ्लैट का जब निरीक्षण करता है , भूखण्ड में दिशाएं एवं विदिशाओं के सहयोग से ऊर्जाओं की जो उत्पत्ति होती है, शोधन एवं परीक्षण करके जानकारी प्राप्त करने का ही नाम वास्तु ज्ञान है। शोधन से जो जानकारियां प्राप्त होती हैं, उन्हें ठीक करवाना ही सकारात्मक ऊर्जाओं के आगमन का द्वार खोलना है। आज व्यवहार में दूरदर्शन पर, समाचार पत्रों में जानकारियां दी जा रही हैं— ‘असंभव’ कुछ नहीं, वास्तु, ज्योतिष, मंत्र और तंत्र विज्ञान आपको सभी कुछ दे सकता है। आपकी हर परेशानियां दूर कर सकता है, कर्ज मुक्त कर सकता है, घर के झगड़े दूर कर सकता है ,संतान पैदा कर सकता है, उपरोक्त शास्त्रों में असंभव कुछ नहीं सब कुछ संभव कर सकता है, कृपया एक फोन करें, चौबीस घंटे में आपकी सभी समस्याओं का समाधान घर बैठे हो जाएगा। फोन करने पर आपको जानकारी प्राप्त होती है। गृह शांति यंत्र की राशि...... रूपया, व्यापार वृद्धि यंत्र की राशि..... रूपया, संतान प्राप्त करने का कवच.... रूपए, दुश्मन से रक्षा करने का रक्षा कवच......रूपए आदि की राशि फोन के द्वारा बताए जाते हैं और एक बैंक एकाउंट नंबर दे दिया जाता है । पैसा जमा करने की सलाह दे दी जाती है। विद्वान अपने तीसरे नेत्र से वहां बैठे ही सब कुछ देख लेता है एवं उपाय बता देता है एवं आपसे रूपये प्राप्त कर लेता है। आज के युग में वैसा संभव है तो क्यों न हम वास्तु पुरुष एवं ज्योतिष का एक मन्दिर बनवा दें हम वहीं पूजा पाठ करें। हमें मंदिर, मस्जिद जाने की जरूरत नहीं है। इबादत करने की कोई जरूरत नहीं है। सच्चे रास्ते पर चलने की जरूरत नहीं है । हर तरह की फितरत करते हुए हम इंसान से शैतान बन जायें मगर हमें वास्तु, ज्योतिष बचा लेगा। प्रकृति परमात्मा से हमारा कोई संबंध नहीं। हम ही विश्व के कर्ता हो गए। मैं आप लोगों से पूछता हूँ ‘यह बात आपका दिलो दिमाग मानने को तैयार है। अगर ऐसा है तो विश्व में कोई दु:खी नहीं रहेगा। कोई बीमार नहीं पड़ेगा। सभी कार्य वास्तु शास्त्र या ज्योतिष ही कर लेगें। न कर्म की जरूरत है और न ही धर्म की जरूरत है। वास्तु विज्ञान आदिब्रह्मा एवं नारायण की देन है। यह पूर्ण वैज्ञानिक आधार पर बनाया गया है। प्राचीन शास्त्रों में कहीं भी इस तरह का उल्लेख मेरे पढ़ने में नहीं आया। अगर किसी के पास ऐसा शास्त्र हो, तो कृपया मुझे उपलब्ध करायें। मैंने तो अपने भ्रमणकाल में देखा और सीखा है, उसका सारांश यही है ‘भूखंड की नकारात्मक ऊर्जाओं के कारण आप परेशान हैं। नकारात्मक विचारों से व्यक्ति हमेशा टेंशन से घिरा रहता है, चिड़चिड़ा हो जाता है। उसको जीवन सार हीन (लक्ष्यहीन) लगने लगता है। भूखंड का शोधन कराने से सकारात्मक भाव एवं विचार पैदा होता है सकारात्मक ऊर्जाओं के आगमन का द्वार खोला जा सकता है। सफलता प्राप्त करने में ऊर्जाएं आपकी सहयोगी बन सकती हैं। सकारात्मक ऊर्जा और सकारात्मक विचार से हमारी समस्याएं कम होती हैं। डिप्रेशन नहीं होता, टेंशन समाप्त हो जाता आदमी अटेंशन हो जाता है। हमारे अंदर उमंग बना रहता है और व्यक्तित्व में निखार आता है। अत: ‘सब ठीक है’ — ऐसा आशापूर्ण गुरू मंत्र अपनाना चाहिए। सच्ची लगन, आत्मविश्वास, लक्ष्य, पुरुषार्थ, समय का सदुपयोग आपको स्वयं करना पड़ेगा, चलना आपको पड़ेगा। सकारात्मक ऊर्जा सहयोगी बनकर आपके साथ चलेगी। आपकी गति बढ़ाने में सहायक होगी। गति की शुरुआत आपको करनी है।

हर एक क्षण मूल्यवान है, सफल बना लें।

जो गया सो गया, अब भी ध्यान लगा लें।।
इस धरती पर मिल जाएगी सफलता बंधुओं।
पुरुषार्थ रूपी दीपक को एक बार जला लें।।

— डॉ. सम्पत सेठी,
(वास्तु एवं निर्मोलॉजिस्ट)
विवेक विहार, हावड़ा