ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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इस मंत्र की जाप्य दो दिन 20 और 21 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं शक्तितस्तपोभावनायै नमः"

ऋषिमंडल विधान

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ऋषिमंडल विधान के विषय में
प्रकाशक दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर
लेखक गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
पुस्तक के विषय में दिल्ली-वूâचा सेठ में वी.नि.सं. २५०६, चैत्र शुक्ला द्वितीया सन् १९८० में यह विधान लिखा। यह विधान दिगम्बर जैन समाज में चिरकाल से प्रसिद्ध है। सुख, शांति व समृद्धि के लिए इस विधान का पूजन व ऋषिमण्डल स्तोत्र का पाठ किया जाता है। माताजी ने विधान पूजन व स्तोत्र भी हिन्दी में बना दिया है, जिससे पढ़ने वालों को विशेष आनन्द प्राप्त होता है।
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