ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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एक्जिमा की दवा

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एक्जिमा

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एक्जिमा कालीमिर्च १० ग्राम, मुरदाशंख, कलईवाला नौसादर १०—१० ग्राम लेकर बारीक पीसकर घी मिलाकर एक्जिमा पर दिन में तीन बार लगायें कुछ दिनों में यह जड़ से खत्म हो जायेगा।

खुजली दस ग्राम नीम के तेल में पाँच बूंद अमृतधारा मिलाकर मालिश करने से हर तरह की खुजली में फायदा होता है। एक जड़ सहित तुलसी का ताजा हरा पौधा लें इसे धोकर साफ कर लें। फिर इसे कूटकर आधा किलो पानी आधा किलो तेल में मिलाकर धीमी धीमी आंच पर पकायें। पानी उबल जाने और तेल बचने पर मसलकर छान लें। यह तुलसी का तेल बन गया। इसे सफेद दागों पर लगायें, लाभ होगा। ढोहया, बेशर्म विलायती आकड़ा, यह जंगली पौधा है। सरलता से मिलता है। इसका दूध एक दो माह तक लगाने से लाभ होता है। इसे आँखों के पास होंठों पर न लगायें। दाद, खाज, खुजली हो तो केले के गूदे को नींबू के रस में पीस लें और लगायें इससे लाभ होता है। नीबू चूसें तथा नारियल के तेल में नींबू मिलाकर मालिश करें लाभ होगा। पिसी हुई हरड़ दो चम्मच दो गिलास पानी में उबालकर छान लें। इसके गर्म पानी से जहाँ खुजली चलती हो धोयें, रुमाल भिगोकर पोछें। लाभ होगा| चमेली के तेल में नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर मालिश करने से सूखी खुजली में लाभ होता है। चमेली के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करने से लाभ होता है। गेहूँ के आटे का लेप करने से चर्म रोग, चर्म दाह, खुजली, टीसयुक्त फोड़े फुन्सी और अग्नि से जले हुए घाव में लाभ होता है। चने के आटे की रोटी बिना नमक की ६४ दिन तक खाने से दाद खुजली में लाभ होता है। दूध में पानी मिलाकर रुई के फोहे से शरीर पर मलें। थोडी देर बाद स्नान कर लें। लाभ होगा। जीरे को पानी में उबालकर उस पानी से नहाने से बदन की खुजली और पित्ती शांत होती है। नीम के सेवन से रक्त साफ होता है। प्रात: २५ ग्राम नीम के पानी का रस लेना लाभदायक है। शोश, खुजली और त्वचा के रोगों में लाल मिर्च में पकाया तेल लगाना प्रात: लाभदायक होता है। वर्षा ऋतु में होने वाली खुजली में यह विशेष लाभदायक है। जननेन्द्रिय पर खुजली होने पर गरम पानी में फिटकरी मिलाकर धोयें। खुजली होने पर अजवाइन पीस कर लेप करें अजवाइन के पानी में मिलाकर उस पानी में धोयें। १० ग्राम कपूर को १०० ग्राम नारियल के तेल में मिलाकर लगाने से लाभ होता है। तेल को जरा सा गर्म करके कपूर मिलाएं। कपूर में त्वचा को सुन्न करने का गुण होता है। जिससे शीघ्र खुजली बन्द हो जाएगी। नीम का तेल या पानी में निबोली पीस कर लगायें। दाद पर नींबू रस २० दिन तक लगाने से दाद गायब हो जाता है। सौन्दर्य प्रसाधन का उपयोग ना करें। जीरे को उबालकर उस पानी में मुँह धोने से मुँह का सौन्दर्य बढ़ जाता है। सफेद चावल को पानी में भिगोकर उस पानी से मुँह धोने से चेहरे की झांई मिटकर रंग साफ होता जाता है।

मुँहासे, मुख सौंदर्य — कील—मुहाँसों से पीड़ित लोग २५० ग्राम मुल्तानी मिट्टी इतना ही चंदन लें। इसकी तीन चम्मच का पेस्ट तैयार कर उपयोग करें। पोदीने की चटनी का लेप करें। लाभ होगा। बेसन को छाछ में घोलकर चेहरे पर लेप करें। मुँहासे ठीक हो जाएंगे। गर्म दूध पर जमने वाली मलाई एक चम्मच पर नींबू निचोड़कर चेहरे पर मलने से मुहाँसे मिट जाते हैं। नींबू के रस को चार गुनी ग्लिसरीन में मिलाकर चेहरे पर रगड़ने से कील मुहाँसे मिट जाते हैं, चेहरा सुन्दर निकल आता है। सारे शरीर पर रगड़ने से त्वचा चिकनी और कोमल हो जाती है। प्रात: दूब पर पड़ा पानी, ओस लगाने से मुहाँसे निकलना बंद हो जाते हैं। जीरे को उबालकर उस पानी से चेहरा धोने से मुख सौंदर्य बढ़ता है।

मस्सा — चेहरे पर मस्से हो जायें तो ४—५ काली मिर्च और बराबर मात्रा में फिटकरी में पानी डालकर गाढ़ा लेप बना लें। इस लेप काे सींक से मस्सों पर दिन में ३—४ बार लगाएं, मस्से निशान छोड़े बिना निकल जायेंगे।

एक्जिमा — धतूरा की ताजा कलियों को गर्म राख में भूनकर लुगदी बनाकर उसमें १ रत्ती नीला थोथा रगड़कर एक्जिमा पर लगायें निश्चित ठीक होगा।

चर्मरोग — मक्का का दलिया बिना नमक का बनाकर मलें और दलिया लगा रहने दें, १ घंटे बाद साफ कर लें, इस तरह ताजा गरम दलिया नित्य दो तीन बार लगायें, असाध्य चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।

गर्मी के फोड़े — आम खाने से बच्चों को जगह- जगह फोड़े हो जाते हैं, उनके ऊपर मात्र आम के अन्दर की गुठली के अन्दर की गिरी को पानी में घिसकर उन फोड़ों पर लगावें। २—३ दिन में बिल्कुल साफ हो जायेंगे। दस ग्राम वैसलीन में चार बूंद अमृतधारा मिलाकर शरीर के हर तरह के दर्द पर मालिश करने से दर्द में आराम फटी बिवाई और फटे होटों पर लगाने से दर्द ठीक होता है एवं फटी चमड़ी जुड़ जाती है।

फोड़ा — फोड़े, फुन्सी, रक्तविकार खुजली हो गई हो तो चार सप्ताह तक नित्य दोपहर में २५० ग्राम अमरूद खायें। इससे पेट साफ होगा। खुजली फोड़े ठीक हो जाएंगे। फोड़ा पक गया हो तो हरड़ को जलाकर बारीक पीसकर वैसलीन में मिलाकर मरहम बनाकर लगायें, एक चम्मच पिसी हुई हरड़ को एक गिलास पानी में उबालकर छानकर हल्के गर्म पानी से फोड़े का सेक करें, धोयें। लाभ होगा। दूध पिलाने वाली स्त्री के स्तन में गाँठ फोड़ा हो जाये तो जीरे को पानी में पीसकर स्तन पर लगाने से लाभ होता है। धतूरे के पत्ते पर घी लगाकर गर्म करके फोड़े पर बाँधने से दर्द ठीक हो जाता है। फोड़ा बैठ जाता है। फोड़े—फुन्सियों पर लाल मिर्च पीसकर लगायें, फोड़े पर पहले तीन मिनट गर्म पानी से सेक करें। फिर एक मिनट ठंडे पानी से सेक करें। इस प्रकार दस मिनट सुबह—शाम सेक करने से लाभ होता है। पिसे हुए चावलों की पुल्टिस सरसों के तेल में बनाकर बाँधने से फोड़ा फूट जाता है एवं पस बाहर निकल जाता है। फोड़े—फुन्सी की सूजन हो तो अजवाइन को नीबू के रस में पीसकर लेप करें, पके फोड़े पर रोज दो बार पीसकर लगाने से फोड़ा फूट जाता है। फोड़ा बड़ा और कठोर हो फूट न रहा हो, उस पर गीली मिट्टी का लेप करें। रिस रहा हो तो उस पर गीली मिट्टी का लेप करें इससे मवाद आ जाएगा। बाद में गीली मिट्टी की पट्टी बाँधें।

नाखूनों से रोगों की पहचान — नारियल या तारपीन का तेल भी नाखूनों की स्वाभाविक चमक और मजबूती को बनाए रखता है। इसी प्रकार ग्लिसरीन को नाखूनों पर मलने से उनका सूखापन दूर हो जाता है और वे सुन्दर लगते हैं। नाखूनों में खुरदरापन है, समतलता नहीं है, छोटे बच्चे नाखून चबाते हैं ये सब कैल्शियम की कमी से होते हैं। कैल्शियम की कमी से नाखून छोटा रह जाता है। चमक चली जाती है या नाखून बढ़ता है तो बहुत पतला व मुलायम रहता है। यदि आपके नाखून न बढ़ते हों तो गर्म पानी में नींबू निचोड़कर उसमें पाँच मिनट अंगुलियाँ रखें, फिर तुरंत ठंडे पानी में रखें, इससे नाखून बढ़ने लगेंगे। नाखूनों पर नींबू का रस लगाने से बहुत मजबूत और सुन्दर रहते हैं। अँगुलियों को धोकर उनके अग्रभाग पर नींबू में रगड़कर सुखा लें। नींबू का रस निकालने के बाद छिलकों को हाथों और नाखूनों पर रगड़ने से नाखूनों की चमक बढ़ जाती है।

होठ फटना — सोने से पहले सरसों का तेल नाभि पर लगाने से होठ नहीं फटते।

एड़ियाँ — सफेद वैसलीन व मोम को एक छोटी भगौनी में डाल दें। आँच पर बड़े भगोने में आधे हिस्से तक पानी भरकर गर्म होने के लिए रख दें। जब पानी उबलने लग जाए तो उसमें छोटी भगौनी रख दें। ध्यान रहे पानी छोटे भगोने के अंदर न जावे। जब सफेद वैसलीन व मोम पिघलकर एक हो जाए तो इन्हें लकड़ी की डंडी से हिलायें तथा इसमें ग्लिसरीन डालकर अच्छी प्रकार से हिला लें। यदि यह जमने लगे तो फिर से गर्म पानी के भगौने में रख दें। अब इसमें नींबू, गुलाब, चमेली व मोगरा जिसकी भी सुगन्ध पसंद हो उसका अर्क डाल दें तथा गर्म—गर्म को ही किसी चौड़े मुँह वाली शीशियों में भरकर ठंडी होने के लिए रख दें। इसका त्वचा पर रात्रि को सोने से पूर्व प्रयोग करें। स्नान करने के पश्चात् नहीं लगायें अन्यथा दिन भर वातावरण में उपस्थित मिट्टी त्वचा पर चिपक जाएगी। इसे अँगुलियों व पैरों पर लगाकर धीरे—धीरे हाथ से त्वचा पर मलिए। इससे त्वचा चिकनी कोमल बनती है तथा बिवाई ठीक हो जाती है।

कोमल होंठ — सोते समय होंठों पर शुद्ध घी लगाएँ, फटे होंठ नरम व नाजुक हो जाएँगे। गर्म रोटी पर लगाया हुआ घी फटे होंठो के लिए लाभदायक है। पैरों की अँगुलियाँ गलती हों, कटती हों तो सरसो का तेल लगाकर मेंहदी छिड़क दें। पानी में काम करने से यदि अँगुलियाँ गल गयी हों तो मेंहदी का एक भाग और इतनी हल्दी दोनों को मिलाकर नित्य में दो बार लगाने से लाभ होता है।

दुर्गंध — शरीर से दुर्गन्ध आने पर दही और बेसन मिलाकर शरीर पर मलें। नासूर, नाड़ीव्रण — आक के दूध में रुई की बत्ती भिगोकर सुखा लें और फिर सरसों के तेल में जलाकर मिट्टी के बर्तन में काजल बनाकर नासूर पर लगायें। लौंग और हल्दी पीसकर लगाने से नासूर मिट जाता है। नीम की पत्तियों का पुल्टिस बाँधें घाव पर पिसी हुई हल्दी बुरकावें। घाव में उत्पन्न कीड़े मर जाते हैं। घाव शीघ्र भर जाता है।

बाला (नारू) — ५० ग्राम घी गर्म करके एक बार नित्य तीन दिन तक पीने से बाला रोग चला जाता है। तिल का तेल गर्म करके बाला निकलने के स्थान पर लगाएं। आकड़े का पत्ता गर्म करके उस पर यही तेल लगाकर बाँधें लाभ होगा। जहाँ बाला निकलता हो वहाँ नीम के पत्तों का लेप करें लाभ होगा।

जलना — जले हुए अंग पर ग्लिसरीन लगा दें। उससे दर्द और छाले नहीं होंगे। जले हुए पर मिट्टी का तेल लगाने से भी लाभ होता है। जलने पर उस स्थान पर ठंडा पानी डालते रहें। जब तक जलन समाप्त न हो तब तक ऐसा करें। इससे फफोले नहीं पड़ते। हल्दी को पानी में घोलकर जले हुए पर लेप करें। सूखने पर बार—बार लेप करें, लाभ होगा। जले हुए पर हरी मिर्च पानी में पीसकर लेप करने से लाभ होता है।

फफोला — मकड़ी द्वारा मूतने से फफोले हो गये हों तो इन पर घी और नमक मिलाकर लगाने से लाभ होता है।

एलर्जी — रात को एक गिलास स्वच्छ पानी में १०० मेंहदी के सूखे पत्ते भिगो दें, सबेरे निथार कर पानी पीयें। शरीर में शीतलता के साथ—साथ रक्त की सफाई भी होगी। एलर्जी वाले रोगियों के लिए यह बहुत उपयोगी है।बेडशूल में कपूर को मद्य में मिलाकर या कर्पूरास्रव को लगाने से घाव नहीं होते, जो हुये हैं, वे ठीक हो जाते हैं।