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21 फरवरी को मध्यान्ह 1 बजे लखनऊ विश्वविद्यालय में पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का मंगल प्रवचन।

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एक समाज की मौत

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संजय माणकचंद पाठ इचलकरंजी यह आशा साहनी की मौत न् , यह मौत थी इंसानियत की । र थी सभ्य समार्ज की । यह मौत । ० और मेरी । इस मौत पर भर कोई रोने वाला नहीं था पर या मेरे जैसे कितने ही संवेदनशील ० को रूला गई । भले ही आशा का अंतिम संस्कार नहीं हुआ , पर वह इस समाज परिवार और इंसानियत का अंतिम संस्कार करके ५२ गई । कौन थी यह आशा साहनी? -' पाठकी आप यह जानना नहीं होगे? आशा साहनी मां थी । वह मेरी ' थी, वह आपकी मां थी और सबसे

६५१ रही कि वह एक बेटे की मां थी और इस कलयुग में वह बेटा श्रवण कुमार नहीं बन सका । दिनांक ३ अगस्त, २०१७ मुम्बई और भारतीय इतिहास में कभी न भूल पाने वाली घटना बन गई और इस घटना की सबसे बड़ी त्रासदी यह रही

इस ० छ छ निकला ही पर पास पड़ोसी भी उस छ से ज्यादा अपराधी निकले । मुम्बई पाश इलाका लोखंडवाला सोसायटी आशा साहनी रहती थी । उस ००८ में उसके दो फ्लैट थे जिसकी १ १९१०ने? की कीमत ४ से ५ करोड़ रू. ०' आशा साहनी के पति की मौत साल पहले हो गई थी । आशा ०

का एक? था ०५३ आई. टी. इंजिनियर है । पति के बाद बेटा अमेरिका चला ८ बूढ़ी माँ मुम्बई में अकेली रह के वापस आने का इंतजार दिन सप्ताह में सप्ताह महीनों में सालों में गुजर गए, पर आया । वृद्धा माँ तड़पती रही पर सुध लेने वाला कोई नहीं था । ० दिन बेटे का फोन आया (जैसा  ? ने पुलिस को बताया) मां तू मां बोली बेटा मैं बहुत परेशान अकेलापन १५२१ खाने को.

क है? यह


इससे तो मैं किसी बद्धाश्रम में चली

३. १११-पत्रा श। एक मशहूर ००