ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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एसिडिटी दूर करने के लिए ये ९ हर्बल तरीके

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एसिडिटी दूर करने के लिए ये ९ हर्बल तरीके

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आदिवासियों का पारंपरिक हर्बल ज्ञान सदियों पुराना, जांचा और परखा है। रोगों के निदान के लिये आदिकाल से वनों में रहने वाले आदिवासी सिर्फ अपनी प्राकृतिक संपदा पर आश्रित रहे हैं। भयावह रोग हो या साधारण, इनके सटीक इलाज के लिए भारतीय आदिवासियों के ज्ञान का कोई तोड़ नहीं, हालांकि आज भी आधुनिक विज्ञान इसकी पुरजोर पैरवी करने से हिचकिचाता है जबकि अधिकांश दवाएं इसी पारंपरिक ज्ञान को आधार मानकर तैयार की गई हैं। आज हम चर्चा करेंगे एसिडिटी से जुड़े पारंपरिक हर्बल ज्ञान की और जानेगें कि किस तरह मध्य और पश्चिमी भारत के आदिवासी अपने पांरपरिक ज्ञान की मदद से एसिडिटी जैसी समस्या का निदान करते हैंं।

आम की ताजी पत्तियों के रस के साथ थोड़ी मात्रा में शक्कर मिलाकर दिन में तीन बार दिए जाने से रोगी को एसिडिटी में तेजी से राहत मिलती है।

शतावरी की जड़ों का चूर्ण तैयार कर गाय के दूध में उबाला जाए और एसिडिटी से ग्रस्त रोगी को दिया जाए तो तेजी से आराम मिलता है। जड़ों के चूर्ण को चाशनी के साथ चाटने से भी फायदा होता है।

अजवायन और धनिया के बीजों की समान मात्रा (२ ग्राम) लेकर इसमें थोड़ी सी शक्कर डालकर थोड़े—थोड़े अंतराल पर लिया जाए तो एसिडिटी में काफी राहत मिलती है। ककडी के बीज ठंडी प्रकृति के माने जाते हैं। आदिवासी अक्सर एसिडिटी में इसके बीजों के सेवन की सलाह देते हैं। डांग, गुजरात के आदिवासियों का कहना है कि ककडी के बीजों को चबाने एसिडिटी में काफी राहत मिलती है।

दूब को पातालकोट के आदिवासी जादुई घास से कम नहीं मानते। अनेक रोगों में फायदा करने के साथ एसिडिटी के लिए भी इसे जबरदस्त कारगर माना गया है। इसकी ताजी पत्तियों के रस (५० मिली) को १० मिली दूध और थोड़ी शक्कर के साथ मिलाकर लिया जाए तो एसिडिटी की समस्या छू—मंतर हो जाती है।

सौंफ के बीजों को दूध में उबालकर दिन में दो बार पीना चाहिए। पातालकोट के हर्बल जानकारों के अनुसार, आधा चम्मच सौंफ लेकर एक गिलास दूध में उबाला जाए और दिन में तीन बार इसी तरह दूध तैयार करके सेवन किया जाए, एसिडिटी में फायदा होता है ।

जलजमनी की पत्तियों को कुचलकर इसमें थोड़ी सी मात्रा में अदरक का रस मिलाया जाए और रोगी को दिया जाए तो आराम मिलता है। आदिवासियों का मानना है कि जलजमनी अम्लनाशक होती है।

हर २—२ घंटे के अंतराल से यदि कचनार के सूखे फूलों का चूर्ण (लगभग २ ग्राम) शक्कर के साथ लिया जाए तो आराम मिलता है।

बोगनवेलिया की पत्तियों को कुचलकर पेस्ट तैयार किया जाए और हर दो घंटे में इसका सेवन किया जाए तो एसिडिटी में काफी असरकारक होता है।

हस्तिनापुर टाईम्स
२९ दिसम्बर २०१४