ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर, रविवार से ११ दिसंबर २०१६, रविवार तक प्रातः ६ बजे से ७ बजे तक सीधा प्रसारण होगा | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

ए भाई जरा देख के चलो

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
ज़रा देख कर चलो .jpg

[सम्पादन]
ए भाई जरा देख के चलो

दोस्तो, महानगरों-नगरों में ट्रैफिक सिग्नल के बिना सुरक्षित यातायात की कल्पना नहीं को जा सकती पर क्या आप यह जानते हैं कि यातायात को नियंत्रित करने वाला आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल हो गया ९० साल का ? आइए जानते हैं इसके विकास की कहानी...

  1. आज ट्रेफिक को जिन लाल हरी-पीली बतीयों को हम देखते हैं और उनके रंंग बदलने पर हम चलते हैं, उसका लंबा इतिहास रहा है|
  2. ट्रैफिक सिग्नल का सबसे पहला प्रयोग 1968 में ब्रिटेन के हाउस आँफ़ पार्लियामेंट में हुआ भी उस समय सिग्नल के बजाय दो रंगों (लहु, हरा) की लालटेन हुआ करतीबी, जिन्हें गैस से जलाया जाता था.
  3. इस खास तरह के ट्रैफिक सिग्नल का आविष्कार किया था जे.पी. नाइट ने ब्रिटिष पार्लियामेंट में बडी सख्या में घोडों को रखने की व्यवस्था थी. वहां ट्रैफिक सिग्नल का इस्तेमाल पार्लियामेंट के अस्तबल में घोडों को नियंन्नित करने के लिए किया जाता था. लैप के रंंग को देखने के बाद घोड़े अपने-अपने स्थान को पहचान लेते थे .
  4. आगे जाकर उक्त गैस लालटेन का इस्तेमाल ब्रिटेन के ट्रैफिक पुलिस आँफिसर भी करने लगे. इसी गैस लालटेन के कारण एक बडी दुर्घटना घटने के बाद इनका प्रयोग बंंद हुवा.
  5. 1920 से अमेरिका में सड़कों पर सिग्नल का नियमित प्रयोग शुरू हुआ.
  6. 1923 में ट्रैफिक सिग्नल के निर्माण की दिशा में ठोस पहल हुई. गैरट आँगस्टस मॉर्गन नामक एक अमेरिकी बिजनेसमैन ने इस पर काम करना शुरू किया.
  7. यही पहला आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल था , जिसमें आधुनिक ट्रैफिक संकेत-पद्धति से मिलते-जुलते एक यंत्र का निर्माण किया गया था.
  8. मॉर्गन का ट्रैफिक सिग्नल अग्रेजी के ही-अक्षर के आकार पर आधारित था,जिससे तीन संकेतों का उल्लेख था .

पहला रुको, दूसरा, जाओ और तीसरा संकेत सभी दिशा में जाने से संबधित था. यह पैदल यात्रिर्यो के लिए था.

  1. उत्तरी अमेरिका में यही सिग्रल काफी समय यूज हुए. बाद में तीनों संकेतों को तीन रंगों (लाल, हरा और पीला) से जोड़ दिया गया.
  2. अमेरिका में पहली बार क्लीवलैंड,ओहियो में ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए. चीन में बार ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम भी है. इसमें ट्रैफिक लाइट बार यानी पट्टी के आकार में होते हैं.