ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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ऐसी शक्ति मिले हमको भगवन्! पाप से दूर जब रह सवें हम

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ऐसी शक्ति मिले

तर्ज—ऐसी शक्ति हमें......

ऐसी शक्ति मिले हमको भगवन्! पाप से दूर जब रह सकें हम।

हम चलें मुक्तिपथ के पथिक बन,
पथ से भटके न प्रभुवर कभी हम।। ऐसी......।। टेक.।।
मन में आए अहं यदि कभी भी, उससे पहले विनय गुण प्रगट हो।
पर को दुख देने से पूर्व निज में, उसकी अनुभूति कर मन सजग हो।।
सबके प्रति सुख व हित भावनाएँ,
मन में आएँ मेरे नाथ हरदम।। हम......।।१।।
मोह ममता में हमने अनादी, काल से अपना जीवन बिताया।
सात व्यसनों में यदि फंस गया तो, नरक पशुगति में जा दुख उठाया।।
रोते रोते वहाँ काल बीता,
पुण्य से पाया फिर मैंने नर तन।। हम......।।२।।
हमको करना है अब प्रभु की भक्ती, और गुरुओं की सत्संगती भी।
इससे ही एक दिन पाऊँ मुक्ती, ‘‘चन्दनामति’’ मिले ऐसी शक्ती।
हँसते-हँसते बिता करके जीवन,
स्वर्ग सम सुख करें प्राप्त हरदम।। हम......।।३।।

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