ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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ऑस्टियोपोरोसिस और उसका इलाज

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ऑस्टियोपोरोसिस और उसका इलाज

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उम्र के साथ-साथ शरीर के रोग भी बढ़ने लगते हैं | बढ़ी उम्र का ही एक रोग है ऑस्टियोपोरोसिस | पुरुषों की अपेक्षा महिलायें इस रोग की अधिक शिकार होती हैं | महिलाओं में इस बीमारी का कारण फ्रैक्चर होना आम बात है, लेकिन सबसे गंभीर तथ्य है कि इस बीमारी के बारे में पहले से पता नहीं चलता |इस बीमारी मैं हड्डियों का तेजी से क्षय होता है | कई बार इस तरह की बीमारी मे लोगों की लंबाई बुरी तरह प्रभावित होती है साथ ही पीठ में कूबड भी निकल आता है |

[सम्पादन] क्यों हैं चिंता का विषय

नेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन का कहना है कि 2025 तक इसके कारण होने बाले फ्रेक्चर ३०लाख तक पहुँच चुके होंगे |५० से अधिक उम्र की दो में से एक महिला और चार में से एक पुरुष को कूल्हे ,रीढ़, कलाई, भुजा और पैरों में फ्रैक्चर हो सकते हैं | इसमें भी सबसे गंभीर माना जाता है कूल्हे का फ्रेक्चर | प्रत्येक व्यक्ति की हड्डियां उम्र के साथ कमजोर होती है. 35 साल की उम्र के बाद शरीर नई हड्डियां नहीं बनाता है उम्र के साथ-साथ आपकी हड्डियां भी जोखिम से घिरती है.

[सम्पादन] वंशानुगत

किसी परिवार में हड्डियां टूटने का क्रम वंश के साथ चला आता है | छोटा शरीर, गौरवर्ण और सुडौल शरीर वाले में इसकी आशंका ज्यादा रहती है. खराब आहार, जैसे कम कैल्शियम वाला खाना, कम वजन और खराब लाइफस्टाइल के कारण यह तकलीफ हो सकती है ऑस्टियोपोरोसिस में कुछ दवायें दी जाती है, जैसे स्टेरॉइड्स | लेकिन इससे थायराॅइड के बढने या घटने की आशंका भी रहती है

[सम्पादन] कैल्शियम

बढते बच्चों को भरपूर कैल्शियम की जरुरत होती है. हड्डियों में वजन और मजबूती है तो यह भविष्य के लिए अच्छा है | बचपन में पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिला हो तो बाद में आँस्टियोपोरीसिस हो सकता है | शरीर हर दिनं कुछ कैल्शियम का होना जरूरी है |वह हड्डियों की गुणवत्ता बनाए रखता है आपको कितने कैल्शियम की जरुरत है, यह आयु के हिसाब से तय होगा -

९ से १८ की उम्र के लडके-लडकियों को 1300 मिग्रा. प्रतिदिन

19 से ५० साल की महिला और पुरुष के लिए १००० मिग्रा. प्रतिदिन

१९ से ५० वर्ष की गर्भवती या इलाजरत महिला के लिए 1000 मिग्रा प्रतिदिन

50 साल से अधिक की महिला और पुरुष को 1200 " मिग्रा प्रतिदिन

डेयरी उत्पाद कैल्शियम का स्रोत है | एक गिलास दूध में 300 मिग्रा. कैल्शियम शरीर को मिलता है हरी पत्तेदार सब्जियां भी कैल्शियम का स्रोत ही है.

[सम्पादन] पता कैसे चलेगा

डाक्टर स्केलेटल एक्स-रे, बोन डेंसिटोमेट्री (बीएमडी) का परीक्षण करवाते हैं, यहि हड्डियों का वजन कम पाया जाता है तो कुछ और टेस्ट होते हैं यह एक मैटाबोलिक हड्डी रूग्णता है. यह हड्डी में असामान्य मिनरलाइजेशन के कारण होता है या किसी को हायपरथायरोडिज्म भी हो सकता है | बोन डेंसिटोमेट्री सुरक्षित और पीडारहित जांच हैं | इसमें हहडी की डेन्सिटी की तुलना उच्चतम डेन्सिटी से कीं जाती है महिलाओं में मैनोपॉज़ के दोरान हड्डियों की डेंसिटोमेट्री जांच की जाती है |

[सम्पादन] ट्रीटमेंट क्या है ?

यह सही है कि जो हड्डी खराब हो चुकी है, उसे बचाया नहीं जा सकता है, लेकिन आगे की हड्डियों को बचाना अहम है | उपचार की विधियां निम्न हैं |

एस्ट्रोजन रीप्लेसमेंट । इसे ईआरटी कहा जाता है 'यह उन महिलाओँ में लागू किया जाता है, जिन्हें आँस्टियोपोरोसिस को आशंका ज्यादा रहतीं है, ताकि उनकी हड्डियों के नुकसान और हड्डी टूटने के जोखिम को कम किया जा सके | बोन डेन्सिटी जब मेनोपॉज के दोरान ली जाती है: तब तय कर लेते हैं कि ईआरटी इस रोगी के लिए ठीक है या नहीं| लेकिन इसमें स्तन कैंसर होने का खतरा रहता है |

[सम्पादन] सिलेक्टिव एस्टोजन रिसेप्टर

न्यू एंटी एस्ट्रोजंस को सिलेक्टिव एस्टोजन रिसेप्टर मॉड्यूलेटर्स (एसईआरएम) के नाम से जाना जाता है, इससे हड्डियों का वजन बढ़ता है, साथ ही रीढ की हड्डी के टूटने की आशंका कम हो जाती है | ब्रेस्ट कैंसर का भी खतरा नहीं रहता |

[सम्पादन] केल्सिटोनिन

यह नेजल स्प्रे की तरह होता है | इससे हड्डियों में मजबूती आती है, साथ ही यह रीढ की हड्डियों के टूटने को रोकता है |

[सम्पादन] फैक्ट

इलाज के दोरान पैराथाॅयराॅइड हार्मोन (टेरीपेराटाइड) का कम डोज दिया जाता है | इससे बोन प्रोडक्शन बढ जाता है | इसे केवल इंजेक्शन से दिया जा सकता है | एक और बात ध्यान रखें कि यह महिलाओं को मैनोपॉज के बाद दिया जाता है |