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औषधि ऋद्धि के आठ भेद

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औषधि ऋद्धि के आठ भेद

आमर्षौषधि, क्ष्वेलौषधि, जल्लौषधि, मलौषधि, विप्रुषौषधि, सर्वौषधि, मुखनिर्विष और दृष्टिनिर्विष।

१. आमर्षौषधि - जिसके प्रभाव से जीव ऋषि के हाथ, पैरादि के स्पर्शमात्र से नीरोग हो जावें।

२. क्ष्वेलौषधि - इस ऋद्धि से मुनियों के लार, कफ, अक्षिमल आदि जीवों के रोगों को नष्ट कर देते हैं।

३. जल्लौषधि - मुनि के शरीर का पसीना सर्व रोगों को नष्ट कर देता है।

४. मलौषधि - मुनि के दांत, नासिका आदि का मल भी रोगों को नाश कर देवे।

५. विप्रुषौषधि - मुनियों के मूत्र, विष्ठा भी जीवों के भयानक रोगों का नाश कर देवे।

६. सर्वौषधि - दुष्कर तप से युक्त मुनियों का स्पर्श किया हुआ जल, वायु आदि सम्पूर्ण व्याधियों का नाश कर देवे।

७. वचननिर्विष (मुखनिर्विष) - तिक्त रस व विष से युक्त विविध प्रकार का अन्न जिन-मुनि के वचन से निर्विषता को प्राप्त हो जाता है।

८. दृष्टिनिर्विष - रोग और विष से युक्त जीव जिस ऋद्धि के प्रभाव से मुनि के द्वारा देखने मात्र से ही नीरोगता को प्राप्त कर लेते हैं।