ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर २०१६- रविवार से सीधा प्रसारण चल रहा है | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

कनकावली व्रत

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

[सम्पादन]
कनकावली व्रत

-stock-photo-1.jpg
-stock-photo-1.jpg
-stock-photo-1.jpg
-stock-photo-1.jpg

भगवान नेमिनाथ ने तीर्थंकर से तृतीय भवपूर्व ‘सुप्रतिष्ठ’ मुनिराज की अवस्था में इन कनकावली आदि व्रतों का अनुष्ठान किया था। वैसे ही भगवान महावीर के जीव ने ‘नंदन मुनिराज’ के भव में इन्हीं व्रतों का अनुष्ठान किया था।

कनकावली व्रत विधि-कनकावली व्रत में ४३४ उपवास और ८८ पारणाएँ होती हैं। इसका क्रम यह है कि एक उपवास एक पारणा, दो उपवास एक पारणा, नौ बार तीन-तीन उपवास और उसके मध्य में एक-एक पारणा, पुन: एक से लेकर सोलह तक क्रमश: उपवास और मध्य में एक-एक पारणा, फिर चौंतीस बार तीन-तीन उपवास और मध्य में एक-एक पारणा, पुन: सोलह से लेकर एक तक क्रमश: उपवास और मध्य में एक-एक पारणा, पुन: नौ बार तीन-तीन उपवास और एक-एक पारणा तथा दो उपवास एक पारणा और एक उपवास एक पारणा इस प्रकार विधि होती है।

कनकावली व्रत विधि यंत्र-

उपवास -१ २ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२

पारणा -१ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १

उपवास -१३ १४ १५ १६ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३

पारणा -१ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १

उपवास -३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ १६ १५ १४ १३ १२ ११ १० ९

पारणा -१ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १

उपवास -८ ७ ६ ५ ४ ३ २ १ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ ३ २ १

पारणा -१ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १ १

इस व्रत में एक वर्ष पाँच मास और बारह दिन लगते हैं। लौकांतिक देवपद की प्राप्ति होना अथवा संसार का अंतकर मोक्ष प्राप्त करना इस व्रत का फल है। इस व्रत में चौबीस तीर्थंकर का मंत्र जपें एवं चौबीस तीर्थंकर पूजा करें।

मंत्र-ॐ ह्रीं अर्हं चतुर्विंशतितीर्थंकरेभ्यो नम: अथवा ॐ ह्रीं वृषभादिवर्धमानान्तेभ्यो नम:।