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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का मंगल विहार जन्मभूमि टिकैतनगर से हस्तिनापुर १८ नवंबर को

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कर्मदहन विधान

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कर्मदहन विधान के विषय में
प्रकाशक दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर
लेखक गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
पुस्तक के विषय में आठ कर्मों की १४८ प्रकृतियों का नाश करने हेतु कर्मदहन व्रत करने की परम्परा जैन समाज में प्राचीन काल से चली आ रही है। उस व्रत के उद्यापन में यह विधान किया जाता है तथा कर्मों के उपशम की भावना से यह विधान कभी भी किया जा सकता है।
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