क्षमा धर्म से अपनी बगिया सजाओ

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क्षमा धर्म से अपनी बगिया


तर्ज—आवाज देकर......

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उत्तम क्षमा धर्म

क्षमा धर्म से अपनी बगिया सजाओ।
गुणों की सुरभि अपने जीवन में लाओ।। टेक.।।

न क्रोधी प्रकृति आत्मा की कही है।
वहाँ तो सदा शान्ति सरिता बही है।।
नहीं क्रोध कर अपनी गरिमा घटाओ।
गुणों की सुरभि......।।१।।

हो यदि कोई दुश्मन तुम्हारा जगत में।
उसे जीत सकते हो तुम प्रेम बल से।।
सहनशीलता धैर्य शक्ती बढ़ाओ।
गुणों की सुरभि......।।२।।

प्रभू पाश्र्व ने ही क्षमा धर्म पाला।
इसे धार ऋषियों ने उपसर्ग टाला।।
उन्हीं सबके चरणों में मस्तक झुकाओ।
गुणों की सुरभि......।।३।।

करूँ प्रार्थना प्रभु मुझे भी क्षमा दो।
प्रभो! मेरे मन को भी चन्दन बना दो।।
यही भावना ‘‘चन्दनामति’’ बनाओ।
गुणों की सुरभि......।।४।।