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चक्रेश्वरी माता की पूजन

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चक्रेश्वरी माता की पूजन

रचयित्री-ब्र.कु. सारिका जैन (संघस्थ)
स्थापना

तर्ज-दीक्षा लेकर..........
चलो सभी मिल पूजा करने, श्री चक्रेश्वरी माता की।
ऋषभदेव की शासन देवी, महिमाशाली माता की।।
इनका आराधन करने से, भक्तों के सब कष्ट भगें।
जो इनकी पूजा करते हैं, उनके दुःख दारिद्र नशें।।

आह्वानन स्थापन करके, करें अर्चना माता की-करें अर्चना माता की।
चलो सभी मिल पूजा करने, श्री चक्रेश्वरी माता की।
ऋषभदेव की शासन देवी, महिमाशाली माता की।।

ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेवि! अत्र आगच्छ आगच्छ संवौषट्।
ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेवि! अत्र स्वस्थाने तिष्ठ तिष्ठ ठःठः।
ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेवि! अत्र मम सन्निहिता भव भव वषट् सन्निधीकरणं।
-अथाष्टक-
तर्ज-माई रे माई......
अष्टद्रव्य का थाल सजाकर, लाए हैं हम माता।
तेरी पूजन करके हम सब, पाएँगे सुख साता।।
बोलो जय जय जय , बोलो जय जय जय-२।।

गंगानदि का पावन जल, कंचन झारी में लाऊँ।
त्रयधारा दे चरणों में, निज दुःख दारिद्र नशाऊँ।।
मिले सदा सद्बुद्धि मुझे बस,......
मिले सदा सद्बुद्धि मुझे बस, यही प्रार्थना माता।
तेरी पूजन करके हम सब, पाएंगे सुख साता।।
बोलो जय जय जय.....।।१।।

ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेव्यै जलं समर्पयामीति स्वाहा।
स्वर्ण कटोरी में सुरभित, चन्दन घिसकर ले आऊँ।
भक्तिभाव से तेरे चरणों, में मैं उसे लगाऊँ।।
इस जग के बहुविध दुःखों से,.......
इस जग के बहुविध दुःखों से, छुटना चाहूँ माता।।
तेरी पूजन करके हम सब, पाएंगे सुख साता।।
बोलो जय जय जय.....।।२।।

ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेव्यै चन्दनं........
जब श्री ऋषभदेव प्रभुवर ने, अक्षयपद पाया था।
तब वैलाशगिरी पर प्रभु ने, स्वातम प्रगटाया था।।
वैसे ही अक्षत पुंजों को.......
वैसे ही अक्षत पुंजों को, करूँ समर्पण माता।
तेरी पूजन करके हम सब, पाएंगे सुख साता।।
बोलो जय जय........।।३।।

ॐ आं क्रो ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेव्यै अक्षतं ..............
तरह-तरह के फूलों के, गहनों से तुझे सजाऊँ।
तेरा सुन्दर रूप निहारूँ, कहीं न जाना चाहूँ।।
पुष्प चढ़ाकर तेरे पद में.....
पुष्प चढ़ाकर तेरे पद में, मन हर्षित हो जाता।
तेरी पूजन करके हम सब, पाएंगे सुख साता।।
बोलो जय......।।४।।

ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेव्यै पुष्पं.......
लड्डू पेड़ा बरफी गुझिया, भरकर थाल चढ़ाऊँ।
तेरे सम्मुख अर्पण करके, जीवन सफल बनाऊँ।।
सुनते हैं माँ तव पूजन से.......
सुनते हैं माँ तव पूजन से, सुख वैभव मिल जाता।।
तेरी पूजन करके हम सब, पाएंगे सुख साता।।
बोलो जय....।।५।।

ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेव्यै नैवेद्यं........
जगमग-जगमग दीप जलाकर, करूँ आरती तेरी।
कहीं न हो अज्ञान अंधेरा, यही भावना मेरी।।
सांसारिक दुख तव आरति से.......
सांसारिक दुख तव आरति से, चूर-चूर हो जाता।
तेरी पूजन करके हम सब, पाएंगे सुख साता।।
बोलो जय......।।६।।

ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेव्यै दीपं........
जग के प्राणी तरह-तरह से, अपना रूप सँवारें।
फिर भी लाभ हुआ नहिं तो वे, आए द्वार तिहारे।।
धूप जलाई तेरे सम्मुख......
धूप जलाई तेरे सम्मुख, और नमाया माथा।
तेरी पूजन करके हम सब, पाएंगे सुख साता।।
बोलो जय.......।।७।।

ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेव्यै धूपं...........
तरह-तरह के फल खाकर भी, तृष्णा शान्त न होती।
फल निष्फल हो जाते हैं, जब तृप्ती ही नहिं होती।।
अब तो मेरे मन में है बस........
अब तो मेरे मन में है बस, शिवफल की अभिलाषा।
तेरी पूजन करके हम सब, पाएंगे सुख साता।।
बोलो जय.....।।८।।

ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेव्यै फलं........
जल चन्दन अक्षत पुष्पों से, मिश्रित अघ्र्य बनाऊँ।
दीप धूप अरु मधुर फलों से, सुन्दर थाल सजाऊँ।।
माँ तेरा मंगल आशिष अब.......
माँ तेरा मंगल आशिष अब, मुझको मिल जाएगा।
तेरी पूजन करके हम सब, पाएंगे सुख साता।।
बोलो जय.....।।९।।

ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेव्यै अर्घम्........
गीता छन्द- जो भव्य चक्रेश्वरी माँ के, पाद में धारा करें।
वे भूत प्रेत पिशाच आदी, बाह्य बाधा को हरें।।
संसार के सुख वैभवों को, वे तुरत ही पावते।
नीरोग रहते वे सदा ही, आत्म शान्ती पावते।।
शांतये शान्तिधारा।

जो विविध भांती के कुसुम से, करते हैं पुष्पांजली।
उनकी भरे झोली सदा, जाते नहीं खाली कभी।।
मन की सभी इच्छाएँ उनकी, शीघ्र पूरी होती हैं।
क्योंकि ये सच है माँ तो ममता, की ही मूरत होती है।।
दिव्य पुष्पांजलिं क्षिपेत् ।

जयमाला
तर्ज-आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ........
श्री चक्रेश्वरी माता की, जयमाल सजाकर लाए हैं।
तेरी सुन्दर छवि को लखकर, रवि शशि भी शरमाए हैं।।
जय चक्रेश्वरी बोलो जय चक्रेश्वरी-२।।

तुम प्रभु ऋषभ की शासनदेवी, गोमुख यक्ष की यक्षी हो।
भक्तों की हर पीड़ा को तुम, क्षणभर में हर लेती हो।।
चक्रधारिणी जगत्पूज्य हो, तेरे गुण को गाए हैं।
तेरी सुन्दर छवि को लखकर, रवि शशि भी शरमाए हैं।।
जय चक्रेश्वरी-४।।१।।

माता तेरा मुखमण्डल, सोने की तरह चमकता है।
नयनों में करुणा एवं वात्सल्य का संगम दिखता है।।
बाधाहरणी मंगलकरणी , शरण तुम्हारी आए हैं।
तेरी सुन्दर छवि को लखकर, रवि शशि भी शरमाए हैं।।
जय चक्रेश्वरी-४।।२।।

तेरे इक सौ आठ नाम, मंत्रों को जो भी पढ़ते हैं।
सुख सम्पति सौभाग्य प्राप्त कर, परमशान्ति को लभते हैं।।
शीलवती त्रैलोक्यपूज्य हो, तव वन्दन को आए हैं।
तेरी सुन्दर छवि को लखकर, रवि शशि भी शरमाए हैं।।
जय चक्रेश्वरी-४।।३।।

तेरी महिमा अगम-अकथ है, कैसे हम गाएँ माता।
दो ऐसा आशीष हमें जो, टूटे ना तुमसे नाता।।
तेरा सन्निध पाकर ही हम, निज मन कमल खिलाए हैं।
तेरी सुन्दर छवि को लखकर, रवि शशि भी शरमाए हैं।।
जय चक्रेश्वरी-४।।४।।

हे चक्रेश्वरी माता! जग पर, ऐसा चक्र चला दीजे।
इस जग के सब प्राणी को अब, सच्चा मार्ग सिखा दीजे।।
यही ‘‘सारिका’’ आस लगाकर, हम तव चरण में आए हैं।
तेरी सुन्दर छवि को लखकर, रवि शशि भी शरमाए है।।
जय चक्रेश्वरी-४ ।।५।।

ॐ आं क्रों ह्रीं श्री चक्रेश्वरी महादेव्यै जयमाला पूर्णार्घ्यम समर्पयामीति स्वाहा।
शांतये शांतिधारा, दिव्य पुष्पांजलिः।
श्री चक्रेश्वरी मात को, वन्दन शत-शत बार।
ऋद्धि-सिद्धियाँ प्राप्त हों, भरे सौख्य भण्डार।।
।।इत्याशीर्वादः।।