जिनशासन में वर्षायोग की महिमा है

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जिनशासन में वर्षायोग


तर्ज—सोनागिरि में.........


जिनशासन में वर्षायोग की महिमा है।
साधु सन्त के चातुर्मास की गरिमा है।।
मूलाचारादिक ग्रंथों में जो लिखा, वही रूप मुनि और आर्यिका में दिखा।।
जिनशासन......................।।टेक.।।

मूलगुण मुनि-आर्यिका के एक सदृश हैं।
दोनों महाव्रती सदा जग से विरक्त हैं।।
इन संग क्षुल्लक क्षुल्लिका भी श्रावकोत्तम हैं।
पिच्छी कमण्डलु से समन्वित संघ चउविध है।।
इनके संघ विहार की जग में महिमा है।
साधु सन्त के चातुर्मास की गरिमा है।।जिनशासन.।।१।।

बीसवीं सदि के प्रथम आचार्य गुरुवर ने।
दिखला दिया सच्चा दिगम्बर पंथ मुनिवर ने।।
संयम करो धारण कभी डरना न संयम से।
श्रावक बनो जब तक न संयम पल सके तुम से।।
श्रावक-साधु दोनों की ही महिमा है।
साधु संत के चातुर्मास की गरिमा है।।fिजनशासन.।।२।।

अवसर मिला है गुरुजनों से ज्ञान लेने का।
चउ संघ को भक्ती सहित आहार देने का।।
मानव ही क्या पशुओं का भी जीवन बदलता है।
तब ‘‘चंदनामति’’ नर जनम का सार मिलता है।।
सब गतियों में मनुषगती की महिमा है।
साधु संत के चातुर्मास की गरिमा है।।जिनशासन.।।३।।