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डिहाइड्रेशन से बचाता है ‘शुद्ध जल’

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डिहाइड्रेशन से बचाता है ‘शुद्ध जल’

डाक्टर कहते हैं कि हमें प्रतिदिन ८-१० गिलास पानी पीना चाहिए। इसका कारण क्या है आप जरूर जानते होंगे कि हमारे शरीर का ७० प्रतिशत पानी हमारी कोशिकाओं में रहता है। उसे वाटर ऑफ लाइफ कहते हैं। प्रोटोप्लाज्म में ९० प्रतिशत पानी है। इसी कारण डायरिया के कारण उल्टियां—दस्त इकट्ठे लग जाते हैं। दस्त और उल्टियों के कारण शरीर का सारा जल बाहर निकल जाता है और डी हाइड्रेशन या निर्जलीकरण हो जाता है जिसके कारण मृत्यु भी हो सकती है।

अत: प्रतिदिन ८—१० गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। लूज—मोशन में शर्बत शिकंजी, जूस, ओ.आर.एस. का घोल लगातार पीते रहना चाहिए अथवा ग्लूकोज ड्रिप द्वारा जान बचानी पड़ती है। गर्मियों में पसीने द्वारा शरीर से जल विसर्जन होता रहता है। पेशाब भी शरीर के जल स्तर को नियंत्रित रखता है ।ए.डी.एच हार्मोन और एड्रीनलिन शरीर के जल स्तर को नियंत्रित रखते हैं।

हमारा पंच भौतिक शरीर — जल , वायु, मिट्टी से बना है। जैसा पानी वैसी वाणी और जैसी वायु तैसी आयु बन जाती है। जीवन के लिए शुद्ध जल और ऑक्सीजन अति आवश्यक है। दूसरे ग्रहों पर पानी और आक्सीजन की खोज हो रही है। तभी वहां मंगल, चांद, शुक्र पर जीवन संभव हो सकता है।

गर्मियों में शर्बत, शिकंजी, जूस फलों के रस पीना स्वास्थ्यकर है। इसके अतिरिक्त पानी पीने के बहाने—सत्तू, गुड़ का शर्बत, आम का पन्ना, रूह आफजा, मैंगों शेक, बनाना शेक बच्चों को दिए जा सकते हैं । किसी भी सूरत में शरीर का पानी कम नहीं होने देना चाहिए। जब प्यास लगती है तो गला सूखता है, जुबान खुश्क हो जाती है। होंठ शुष्क हो जाते हैं। प्यास लगने का आदेश हमें ब्रेन का थस्र्ट —सेंटर देता है जिस कारण हम पानी पीते हैं।

हमारी चमड़ी की आर्दता, चमक और चेहरे का ग्लो—जितना ज्यादा पानी पिएंगे, उतना ज्यादा बढ़ता है। अपना सौन्दर्य और स्वास्थ्य बनाए रखना चाहते हैं तो प्रतिदिन ८-१० गिलास पानी जरूर पिएं। सौन्दर्य वृद्धि, स्वास्थ्य वृद्धि, स्वास्थ्य वृद्धि एवं कायाकल्प का अचूक सूत्रा है जल सेवन। कई लोग प्रात: उठकर एक दो गिलास पानी पीते हैं। उन लोगों को कब्ज नहीं सताती। कब्ज को दूर करता है पानी।

नारियल पानी— दक्षिण में बहुत सस्ता रहता है। यह दिलो दिमाग को कुन्दन बनाता है। शरीर को तन्दुरूस्त रखने के लिए सारे शरीर की तेल मालिश भी करनी चाहिए। कब्ज वाले लोग गुदामार्ग से जल चढ़ा कर एनिमा करते हैं और स्वस्थ रहते हैं। नाक द्वारा जल नेति करके नासिका मार्ग स्वच्छ करते हैं। पेट के जहर निकालने के लिए ज्यादा पानी पी कर न्यौली क्रिया द्वारा—फव्वारे की तरह पानी मुख द्वारा बाहर फेक दिया जाता है। जल जीवन है। जल पानी ही नहीं, दवा भी है। यह एक घोलक है। भोजन को पचाता है, रूधिर को चलाता है और शरीर के रस बनाता है।


जिनेन्दु अहमदाबाद
२८ दिसम्बर, २०१४