Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ पू.माताजी की जन्मभूमि टिकैत नगर (उ.प्र) में विराजमान है |

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें जिनाभिषेक एवं शांतिधारा पुन: ज्ञानमती माताजी - चंदनामती माताजी के प्रवचन |

णमोकार मंत्र का महातम्य

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
णमोकार मंत्र का महात्म्य
J.JPG

जीवंधर कुमार ने मरते हुए कुत्ते को णमोकार मंत्र सुनाया जिसके प्रभाव से वह मरकर देवगति में सुदर्शन यक्षेन्द्र हो गया। उसने वहाँ से आकर जीवंधर कुमार को नमस्कार किया और स्तुति की।

एसो पंच णमोयारो, सव्वपावप्पणासणो ।।

मंगलाणं च सव्वसिं, पढमं हवइ मंगलं।।
अर्थ- यह पंच नमस्कार मंत्र सब पापों का नाश करने वाला है और सब मंगलों में पहला मंगल है।
शिष्य - गुरूजी! क्या हम लोग पांचों परमेष्ठी में से किसी का पद प्राप्त कर सकते हैं?

अध्यापक - हाँ! आप लोग मनुष्य पर्याय से पाँचों परमेष्ठी के पद प्राप्त कर सकते हैं। देखो! दिगम्बर मुनियों के संघ में आचार्य, उपाध्याय और साधु ये तीनों परमेष्ठी रहते हैं। ये ही मुनि आगे अरिहंत -सिद्ध भी बन सकते हैं।