तीरथ का इसकी कीरत का

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तीरथ का, इसकी कीरत का


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तर्ज-जिनवर की.......

तीरथ का, इसकी कीरत का, वैसे मैं करूँ गुणगान-२।
भक्ती से, इसकी भक्ती से, होगा सभी का कल्याण-२।।टेक.।।

भवसागर से जो तिरवाते, वे ही तीरथ माने जाते-२।
उसकी रज से जीवन होगा महान.......।।तीरथ.।।१।।

गर्भ जन्म जहाँ प्रभु के होते, उनके दर्शन अघमल धोते-२।
पावन दीक्षा व ज्ञान निर्वाण......।।तीरथ.।।२।।

भारत वसुधा गौरवशाली, हुए जहाँ पर कितने अवतारी-२।
तभी दुनिया में है इसका नाम......।।तीरथ.।।३।।

ऋषभ वीर श्री राम का कहना, मानव जीवन सार्थक करना।
तभी तुम भी बनोगे भगवान......।।तीरथ.।।४।।

जिनशासन की अमिट धरोहर, कहे ‘‘चंदना’ पूज्य ये तीरथ।
इसके वन्दन से मिलता मुक्तीधाम......।।तीरथ.।।५।।