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थॉयरायड के मरीजों को कम क्षमता की दवा लेनी होगी

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थॉयरायड के मरीजों को कम क्षमता की दवा लेनी होगी

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नई दिल्ली। थॉयरायड कैसर को सर्जरी कराने के बाद मरीजों को अब कम क्षमता की आयोडीन युक्त दवाएं लेनी होगी। इस बाबत अमेरिकन थॉयरायड एसोशिएसन की ओर से जारी गाइडलाइन को भारतीय डॉक्टरों ने भी सहमति दे दी है। इस गाइडलाइन के बाद रेडियोधर्मी दवाओं का असर सामान्य सेल्स पर कम पड़ेगा और मरीजों को दोबारा कैसर होने के बाद खतरे से बचाया जा सकेगा।

एम्स के न्यूक्लियर मेडिसीन विभाग के प्रमुख डॉ. सीएम बाल ने बताया कि थॉयरायड कैसर की सर्जरी के बाद अब तक मरीजोंं को अधिक मात्रा की रेडियोधर्मी दवाइयां दी जाती थी, जिसकी वजह से सामान्य सेल्स भी कमजोर हो जाती थी। थॉयराइड ग्रंथि क्योंकि शरीर में थॉयराइड हार्मोन का स्राव करती हैं, इसलिए सर्जरी के बाद ऐसी दवाएं दी जाती हैं। जो आयोडीन की कमी को पूरा कर सके। कैसर युक्त थॉयराइड की सर्जरी के बाद आयोडीन के साथ ही मरीज को ऐसा इलाज दिया जाता है। जिससे कैसर दोबारा न पनप सके, इसके लिए अधिक मात्रा की रेडियोधर्मी आयोडीन की खुराक लंबे समय तक दी जाती है। हाल ही में अमेरिकन थॉयराइड एसोसिएशन ने इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें मरीजों को दी जाने वाली १००—१५० मिलीग्राम दवा की खुराक कम करके ३० मिलीग्राम तक कर दी गई है। गाइडलाइन के तहत यह भी कहा गया है कि मरीज का रेडियोधर्मी आयोडीन इलाज करने से पहले अल्ट्रासाउंड और फाइन नीडल एस्परेशन जांच भी जरुर की जानी चाहिए। मालूम हो कि दवा की खुराक का सीधा फायदा मरीजों को होगा। सेल्स पर रेडियोधर्मी दवाओं का असर नहीं पड़ेगा। इंडियन थॉयराइड सोसाइटी के अनुसार देश में इस समय ४.२ करोड़ लोग थॉयराइड के तीन प्रतिशत मामले थॉयराइड कैसर के होते है। वहीं, प्रति वर्ष थॉयराइड कैसर के १० हजार नये मरीज सामने आते हैं।

क्या है थॉयराइड थॉयराइड हार्मोस के असंतुलन के कारण होता है। थॉयराइड का कम या ज्यादा होना इस बीमारी का कारण है। अगर किसी के शरीर में हार्मोस कम होने लगता है तो इससे मेटबेल्जिम की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इस प्रक्रिया में अधिक ऊर्जा खर्च होती है। अगर हार्मोस बढ़ जाता है तो मेटाबेलिज्म की क्रिया धीमी पड़ जाती है और शरीर में ऊर्जा का बनना कम हो जाता है। स्क्रीनिंग कार्यक्रम में अन्य जेनेटिक कमियां जैसे लाइमोर्जोल डिसआर्डर मल्टीपल स्केरोलेसिस आदि शामिल है।

३.९७ प्रतिशत में थॉयराइड का स्तर बढ़ा इंडियन जर्नल ऑफ इंडोक्रायनोलॉजी के जुलाई महीने में छपे अंक के अनुसार १८-३५ साल की उम्र के ११ प्रतिशत लोगों का थोइराइड बढ़ा हुआ है। अध्ययन के अनुसार दिल्ली में ३.९७ प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनका थॉयराइड स्तर बढ़ा हुआ है। कोलकाता में सबसे अधिक २२ प्रतिशत लोगों का थोयराइड अनियंत्रित पाया गया।

१०० से १५० मिलीग्राम दवा की खुराक दी जाती है अभी तक ३० मिलीग्राम तक दवा की खुराक दी जाएगी नई गाइडलाइन के अनुसार।

जिनेन्दु
१४ दिसम्बर, २०१४