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देव शास्त्र गुरु का ही, जीवन में सहारा है

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देव शास्त्र गुरु का

तर्ज—एक तेरा साथ......

देव शास्त्र गुरु का ही, जीवन में सहारा है।

नहि कोई भी किनारा है।। देव......।। टेक.।।
तीन रत्न ये जिनशासन में, सच्चे माने जाते,
इनके आराधन से मानव, तीन रतन को पाते।
सम्यग्दर्शन ज्ञान चरित ही......
सम्यग्दर्शन ज्ञान चरित ही सच्चा मुक्तिद्वारा है।
नहि कोई......।। देव......।।१।।
देव मंदिरों में रहते, श्रीशास्त्र वहीं पर देखे।
गुरुजन शहरों की गलियों में, विचरण करते देखे।।
ये ही गुरुवर जन-जन को......
ये ही गुरुवर जन-जन को भवदधि से करते पारा हैं।
नहि कोई......।। देव......।।२।।
गुरु के चरणों से जिस घर का, कण-कण पावन होता है।
उनके दिव्य प्रवचनों से भी, जो मन पावन होता है।।
उसकी काया का ही ‘चंदना’......
उसकी काया का ही चंदना हो जाता उद्धारा है।
नहि कोई......।। देव......।।३।।
जब भी साधु मिलें या साध्वी, उन सबका सम्मान करो।
अपने भावों को न छुपाकर, निज पर का उत्थान करो।।
इसी अनादी परम्परा को......
इसी अनादी परम्परा को हम सबने स्वीकारा है।
नहि कोई......।। देव......।।४।।

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