नवग्रह शांति चालीसा

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नवग्रह शांति चालीसा

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चौबीसों तीर्थेश हैं,जग के तारणहार |
नितप्रति भक्ती मैं करूँ,मन मंदिर में धार ||
उनमें से नौ जिनप्रभू,नवग्रह स्वामी जान|
श्री जिनसागर सूरिकृत,ग्रन्थ करें व्याख्यान ||
उन नवग्रह के स्वामि का,चालीसा सुखकार|
ग्रह अरिष्ट को दूर कर,देता शांति अपार ||
-चौपाई -
जय जय वीतराग तीर्थंकर,हे प्रभुवर!तुम सर्व हितंकर||१||
निज पर का उत्थान किया है,आत्मा में ही रमण किया है||२||
आठ कर्म को नाशा तुमने,सिद्धपती कहलाए तबसे ||३||
जो जन भक्ति भाव से ध्याते,दुःख संकट सब ही मिट जाते||४||
देव,शास्त्र,गुरु तीन रत्न हैं,पापों का नित करें शमन हैं ||५||
भवदुख से हर दुखी प्राणि को,सौख्य दिलाते हैं हरदम ये ||६||

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चार गती में देवगती है,देवगती में ज्योतिष इक है||७||
मध्यलोक के नभमंडल में,निज विमान में रहते हैं वे ||८||
जन्म समय से संग में रहते,राशी से सुख दुःख हैं देते ||९||
सूर्य,चन्द्र,मंगल,बुध,गुरु हैं,शुक्र,शनी,राहू,केतू हैं ||१०||
जन्म हो या फिर लग्नकुंडली,प्राणी के संग रहते नित ही ||११||
इन ग्रह का जब चक्र सताता,प्राणी दुखों से अकुलाता ||१२||
ज्योतिषि के अनुसार चले जब,उनका नित्य उपाय करें तब ||१३||
अगर उच्च स्थान पे रहते,यशकीर्ती सुख संतति देते ||१४||
रहते निम्न स्थान पे जब वो,दुःख देने में निमित बने वो ||१५||
नहीं किसी का कुछ ग्रह लेते,निज स्वभाव से गमन ये करते ||१६||
जैसे मंगल कार्य हेतु जब,करता है प्रस्थान कोई तब ||१७||
शगुन दिखे हो कार्य की सिद्धी,ऋद्धि वृद्धि मिलती समृद्धि||१८||

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किन्तु अगर विपरीत दिखाता,कार्यसिद्धि नहिं वो कर पाता ||१९||
निमित मात्र ग्रह योग प्रबल है,प्राणी को देता सुख दुःख है ||२०||
अशुभ योग जिनभक्ति से टलते,नवग्रह शांति विधान जो करते ||२१||
कर्म असाता सभी शांत हों,भव्यों का नित ही कल्याण हो ||२२||
अगर सूर्यग्रह तुम्हें सताए,पद्मप्रभु भगवान बचाएं ||२३||
करें चंद्रग्रह शांत चन्द्रप्रभु,चन्द्र चिन्ह से जानें जिनको ||२४||
वासुपूज्य प्रभु हरें असाता,मंगलग्रह की मेटें बाधा||२५||
बुधग्रह के स्वामी मल्ली हैं,जिनसे खिलती सुख वल्ली है ||२६||
गुरुग्रह के स्वामी महवीरा,भक्तों की हर लेते पीड़ा ||२७||
उच्च यश सहित सबको करते,कर्म असाता क्षण में टरते||२८||
अगर शुक्रग्रह जिसे सतावे,पुष्पदंत जिनवर को ध्यावें ||२९||
शनिग्रह अगर उग्र हो जाए,मुनिसुव्रत प्रभु को वह ध्याए ||३०||

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नेमिनाथ राहूग्रह स्वामी,हरें कष्ट जग में हैं नामी||३१||
पार्श्वप्रभू की शरणा आओ,केतू ग्रह की शांति कराओ ||३२||
इन नव तीर्थंकर को भज लो, नवग्रह की शांती सब कर लो||३३||
विधिवत नवग्रह पाठ करो तुम,पूजन अर्चन से सुख लो तुम ||३४||
जिस ग्रह का जब भी प्रकोप हो,उनका विधि से जाप्य मन्त्र हो ||३५||
जितनी संख्या शास्त्र में आई,अनुष्ठान करना तुम भाई ||३६||
उन उन ग्रह की शांती होगी,इच्छित फल की प्राप्ति होगी ||३७||
ग्रह प्रकोप हो जब भी जिस पर,जिनशासन की शरणा लो बस ||३८||
नहिं मिथ्या भ्रम में फँस जाना,प्रभुवर का नित ध्यान लगाना ||३९||
जन्मकुंडली में शुभ होगा,जीवन भी नित उज्जवल होगा ||४०||

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-दोहा-
नवग्रह शांती के लिए,श्री जिनवर को ध्याय |
रोग,शोक,संकट टले,सुख सम्पति अधिकाय||१||
चालीसा चालीस दिन,पढ़े "इंदु" जो पाठ |
मनवांछित इच्छा फले,जीवन में नित ठाठ ||२||

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