निज ध्यान करने, गुणगान करने

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निज ध्यान करने


तर्ज—कभी राम बनके......

निज ध्यान करने, गुणगान करने,
चले आना आतम में चले आना।। टेक.।।

बड़ा चंचल है मन इसको बांधो।
बड़ा नश्वर है तन इसको साधो।।
शुद्धात्म भजने, परमात्म भजने,
चले आना आतम में चले आना।।१।।

कभी ॐकार में मन रमाओ।
कभी मन में प्रभू को बसाओ।।
मंत्र जाप करने, मन को साफ करने,
चले आना आतम में चले आना।।२।।

मन के मंदिर में वेदी बनाओ।
उसपे आतम प्रभू को बिठाओ।।
पूजा पाठ करने, मन एकाग्र करने,
चले आना आतम में चले आना।।३।।

भावों का छत्र प्रभु पे लगाओ।
‘‘चन्दना श्रद्धा चंवर ढुराओ।।
प्रभु को प्राप्त करने, आतम लाभ वरने,
चले आना आतम में चले आना।।४।।

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