पर्व आया, प्रेम भर लाया, धरम पथ भाया

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पर्व आया


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तर्ज—फिरकी वाली......


(रक्षाबन्धन के शुभ अवसर पर गाने वाला भजन)

पर्व आया,
प्रेम भर लाया, धरम पथ भाया, कथा विख्यात है,
रक्षाबंधन सभी को याद है।।टेक.।।

जन्मभूमि में विष्णुमुनी ने, निज वात्सल्य दिखाया था।
सप्तशतक मुनियों की रक्षा, कर कर्तव्य निभाया था।।
हस्तिनापुर की, धरती तब, उपसर्ग से कांप रही थी,
ऐसे क्षण में,
महामुनिवर ने, मुनीपद तज के, किया सब शान्त है,
रक्षाबंधन सभी को याद है।।१।।

उस दिन चौके में सबने, िंसवई की खीर बनाई थी।
जले कण्ठयुत उन मुनियों को, कोमल खीर खिलाई थी।।
पुन: सभी ने, खुश हो मन में, रक्षासूत्र बंधाया,
उस दिन से ही,
धर्मरक्षा का, नियम ले लिया था, सभी नर नारि ने,
रक्षाबंधन सभी को याद है।।२।।

पैंसठ लाख वर्ष से, रक्षाबंधन पर्व मनाते हैं।
भाई ले संकल्प बहन से, रक्षासूत्र बंधाते हैं।।
भूल गये उन, मुनि की यादें, खीर लगे खुद खाने,
मेरे बंधू!
धरम को न तजना, याद सदा रखना, कथा जो बेमिशाल है,
रक्षाबंधन सभी को याद है।।३।।

श्रावण सुदी पूर्णिमा को तुम, हस्तिनापुर को याद करो।
श्री अकम्पनाचार्य विष्णुमुनि, का पूजन सत्कार करो।।
साधु मिलें ‘‘चन्दनामती’’ जो, उनकी वाणी सुनना,
भाई बहनों!
यही है कहानी, पर्व की निशानी, जो प्रेम की मिशाल है,
रक्षाबंधन सभी को याद है।।४।।