पर्व दशलक्षण आया है

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पर्व दशलक्षण आया


तर्ज—चाँद मेरे आ जा रे......

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पर्व दशलक्षण आया है-२
भक्तों ने प्रभु की भक्ति से अपना, उपवन सजाया है।। पर्व...।। टेक.।।

दशलक्षण का ये बगीचा, कितना सुन्दर लगता है।
भादों शुक्ला पंचमि से, चौदस तक यह सजता है।।
पर्व दशलक्षण आया है।।१।।

कर्मों की विलक्षण गति है, ये सबको नाच नचाते।
इनसे मुक्ती पाने की, युक्ती ये धर्म बताते।।
पर्व दशलक्षण आया है।।२।।

यह पर्व क्षमागुण का शुभ, संदेश लिए आता है।
भव-भव के वैर भुलाकर, मैत्री को सिखलाता है।।
पर्व दशलक्षण आया है।।३।।

मेरे आतम में भी प्रभु, ये धर्म दशों बस जावें।
पारस प्रभु सम कष्टों में, भी धैर्य हृदय बस जावे।।
पर्व दशलक्षण आया है।।४।।

यह धर्म कल्पतरु मुझको, सौभाग्य से प्राप्त हुआ है।
‘‘चन्दनामती’’ नरभव का, अब सच्चा ज्ञान हुआ है।।
पर्व दशलक्षण आया है।।५।।