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पीठाधीश क्षुल्लक श्री मोतीसागर जी महाराज की आरती

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पीठाधीश क्षुल्लक श्री मोतीसागर जी महाराज की आरती

रचयित्री-ब्र. कु. इन्दु जैन (संघस्थ)
मोतीसागर महाराज. आज तेरी आरती उतारूँ

आरती उतारूँ, तेरी आरती उतारूँ ।।
पीठाधीश महाराज, आज तेरी आरती उतारूँ ।
मोतीसागर महाराज, आज तेरी आरती उतारूँ ।। टेक. ।।
पिता अमोलक जी हरषाए, माँ रूपा धन्य भाग्य कहाए ।
नगरी सनावद महान, आज तेरी आरती उतारूँ ।। मोती.... ।। 1 ।।
बचपन से वैराग्य मन में समाया, त्यागमार्ग तुमने अपनाया ।
ब्रह्मचर्य व्रत लिया धार, आज तेरी आरती उतारूँ ।। मोती.... ।। १ ।।
सन् सरसठ में भाग्य ?? गया, ज्ञानमती माता का सघिइ मिल गया ।
त्याग दिया घर बार, आज तेरी आरती उतारूँ ।। मोती.... ।। 3 ।।
गुरुभक्ति में दृढ रहते हमेशा, संस्कृति सुरक्षा की देते हैं शिक्षा ।
अनुपम गुणों की खान, आज तेरी आरती उतारूँ ।। मोती.... ।। 4 ।।
विमलसिन्यू गुरु गजपुर में आए, दीक्षा लिया तुम क्षुल्लक कहाए ।
मोतीसागर मिला नाम, आज तेरी आरती उतारूँ ।। मोती.... ।। 5 ।।
श्रावण सुदी सप्तमी तिथि है आई, पीठाधीश की पदवी है पाई ।
आगमयुत चर्या महान, आज तेरी आरती उतारूँ ।। मोती.... ।। 6 ।।
धर्मदिवाकर क्षुल्लकरत्न जी, आशा ये पूरो 'इन्दू' के मन की ।
मुक्ती का मिले साम्राज्य, आज तेरी आरती उतारूँ ।। मोती.... ।। 7 ।।