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ॐ ह्रीं केवलज्ञान कल्याणक प्राप्ताय श्री विमलनाथ जिनेन्द्राय नमः |

पुलकसागर मुनिराज से सम्बन्धित भजन

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पुलक सागर मुनिवर (आरती )

वैराग्य मूर्ति

परम पुनीत है वात्सल्य धाम

ऊंचा है रुतबा

पूज्यनीय श्री पुलक सागर

तेरे हाथो की लकीर

आओ उतारे आरती

मुनिवर मुनिवर

देवा हो देवा

रह न सकू गुरुवर

तुझमें प्रभु दिखता

महिमा तेरी इतनी बड़ी

गुरु भक्ति में हे रमना

वाणी में तेरी

पारस हमारे जग से न्यारे

पुलक सगरम नमो नम:

श्री गुरुदेव पुलक सागर की

गुरु से लगन ले

महाधिवेशन की मंगल बेला

गुरुवार की चरणों में शीश

जय हो पुलक सागर तेरी जय जय

करुना के सागर

गुरु तुम हो ज्ञानी

भक्त भी दीवाना हुआ

लगाने लगी है सवारी

नील गगन में चंदा

मन लेकर आये गुरु तेरे चरणों में

जिक्र गुरुदेव का

ओ गुरुवर प्यारा

हम गुरुपद सेवक हे

नमन करूं मैं तो

म्हारे भाग जगे

हर किसी को नहीं मिलता

गुरु देव पधारो म्हारे देस

हर दिल में बसा एक नाम

अभी न जाओ छोड़कर

ओजस्वी वाणी से सारे देश में जाने जाते हें

मुनि पुलक सागर की वाणी

महिमा बड़ी बाबा महिमा बड़ी

मुनि पुलक सागर नैनों बीच

साँची कहे तोरे आवन

गुरुदेव गुरुदेव मेरे

करुणामयी गुरुदेव मेरे

भीकमचंद पिता के लाल

पुलक सागर के प्रणाम

नाम पुलक सागर

महिमा गुरुवर पुलक सागर

पीछी और कमंडल

हमारा पुलक चेतन मंच

वर्षा योग में धर्म की वर्षा करने गुरुवर आये हैं

कर विहार गुरुदेव बिहारी

चलो रे चलो सब तिजारा चलो

नील गगम

तन पुलकित अपना मन पुलकित

घर आगन आज सजदो

है पुलक सागर धन्य है

मंत्रो की गागर है पुलक

बरगी बन जाना है

किसी ने जप ताप योग

पुष्पदंत गुरुवर हमारे

पुलक मुनि आये नगरी में

गुरुवर है कितना प्यारा

मेरे गुरुवर पुलक सागर

में पूजता हूं उनको

छोड़ के सारी दुनिया

यही पड़ी रह जाती है

शिव द्वार ही तू है

दुनिया में ऐसा कहाँ सबका नसीब है

गुरुवर मेरे

वंदे श्री गुर्रुसग्राम

छोटे सी उमर में दीक्षा लेकर

गुरुदेव पुलक सागर मेरे

अपनी ही भूल में

आपकी शरण

गुरुदेव शरण तेरी आया ही

भक्तो को रहने दो

पुलक सागर जी को आतम ज्ञान

सारे रिश्ते नाते छोड़

पापी आधारम

पुलक सागर मिले गुरुवर

अपने किये की सजा

संसार के सागर में

जहाँ कांटे बनेगे फूल

अंखियो के झरोको से

संसार के सागर मिलते ने किनारे

में तो कब से तेरी