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प्रज्ञाश्रमणी चंदनामती माताजी की पूजा

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प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी की पूजन


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-स्थापना-
तर्ज ....तेरी रसके कमर ....

चलो भक्तों चलो , माता के दर चलो , चलकर पूजा रचाये , मजा आ गया |
आज पूजा करी , चंदनामतीजी की , मैंने पूजा रचाई , मजा आ गया |
ज्ञानमती जी की शिष्या है प्रज्ञाश्रमणी , इनने ज्ञान का अमृत लिया मात से -२
चन्दन से भी शीतल इनकी वाणी मधुर , इनकी वाणी सुनी तो मजा आ गया -२ |

चलो भक्तों चलो ......
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ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मातः अत्र अवतर-अवतर संवौषट् आव्हाननं |
ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मातः अत्र तिष्ठ-तिष्ठ ठः-ठः स्थापनं |
ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मातः अत्र मम सन्निहितो भव्-भव् वषट् सन्निधीकरणं स्थापनं |


-अष्टक-

तर्ज ......शायद तेरी शादी का ख्याल .....

आज चंदनामती माता की पूजा रचाएंगे , सभी भक्त मिलकर मनवांछित फल को पाएंगे ..२ |
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माता मोहिनी की कुक्षी से , जन्म लिया इक कन्या रत्न ने |
जन्मी ज़्येष्ठ वदी मावस में , सन् उन्निस सौ अट्ठावन में |
मात चंदनामती जी के चरणों में , स्वर्णिम कलश से धार करें |
अपना जीवन धन्य करें ,और मन को भी आनंद करें |
आज चंदनामती माता की पूजा रचाएंगे .....

ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मात्रे जलं निर्वपामीति स्वाहा|
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वत्सलता की मूरत माँ `के , चरणों चन्दन चर्च करें |
चन्दन लेपन करके अपने , जीवन को सुरभित भी करें |
मेरी आत्मा भी सुरभित हो , भाव हृदय में लाते हैं |
इनके तप ,त्याग ,संयम की गौरव गाथा गाते हैं |
आज चंदनामती माता की पूजा रचाएंगे .....

ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मात्रे चंदनं निर्वपामीति स्वाहा|
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हम अक्षत तंदुल ले आये , माता के निकट चढ़ाने को |
करके तेरा गुणगान मात हम , आये पुंज चढ़ाने को |
रचियत्री ,कवियत्री माँ ने सर्व मनोरथ सिद्ध किये |
गणिनी माता की शिष्या ने , किया गुरु पद में अर्पण हैं |
आज चंदनामती माता की पूजा रचाएंगे .....

ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मात्रे अक्षतं निर्वपामीति स्वाहा|
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पुष्प चढ़ाऊँ माँ के सम्मुख , काम व्यथा नश जायेगी|
माँ के रजकण कुछ मिल जावे , मन को शांती दिलाएगी |
मात के दिव्य वचन सुनकर सब , आनंदित हो जाते हैं |
गणिनी ज्ञानमती जी की शिष्या को हर्षित शीश झुकाते हैं |
आज चंदनामती माता की पूजा रचाएंगे .....

ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मात्रे पुष्पं निर्वपामीति स्वाहा|
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कितने व्यंजन खाये मैंने , न भूख की तृष्णा शांत हुई |
मेरा क्षुध विनाश हो जाये , मन में यह इच्छा आज हुई |
चढा रहें नैवेद्य हम , पूजन कर क्षुध शांति मिले |
मात चंदनामती जी की वत्सलता से सुख -शांति बाहर मिले |
आज चंदनामती माता की पूजा रचाएंगे .....

ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मात्रे नैवेद्यं निर्वपामीति स्वाहा|
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दीपक में घृत बाती बनाकर , माता करूं अब आरती |
रोग ,शोक संकट मिल जावे , ज्ञान की ज्योति प्रकाशती |
दीपक से हम आरती करने ,आये तिमिर नशाने को |
ऐसी प्रज्ञाश्रमणी माता की भक्ति याद दिलाने को |
आज चंदनामती माता की पूजा रचाएंगे .....

ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मात्रे दीपं निर्वपामीति स्वाहा|
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माता की पूजा करने में हम , धूप अग्नि में दहन करें|
अष्टकर्म को नष्ट करें ,और जीवन को सुरभित भी करें|
रत्नत्रय से संयुत माता , के चरणों में नमन करें‍|
करके तेरा गुणगान मात अब ,आये धूप जलाने को |
आज चंदनामती माता की पूजा रचाएंगे .....

ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मात्रे धूपं निर्वपामीति स्वाहा|
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आम , आम , अनार , अंगूर आदि से , माता की पूजा रचाएंगी |
फल का थाल सजाकर भक्तों , पूजूँ हर्ष बढ़ाएंगे |
अविनश्वर फल पाने हेतू ,फल का थाल सजाया |
मात चरण में फल को चढाकर तजूँ जगत से मोह माया |
आज चंदनामती माता की पूजा रचाएंगे .....

ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मात्रे फलं निर्वपामीति स्वाहा|
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प्रज्ञाश्रमणी की पूजन में , अर्घ्य का थाल सजाये चलो |
सभी भक्त हर्षित हो करके , माता के गुण को गाये चलो |
गणिनी ज्ञानमती जी की शिष्या को , सादर शीश नमाते हैं |
पद अनर्घ्य मिल जाये मुझे भी , यही भावना भाते हैं |
आज चंदनामती माता की पूजा रचाएंगे |

सभी भक्त मिलकर मनवांछित फल को पाएंगे |

ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मात्रे अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा |



- शान्तये शांतिधारा -
तर्ज .....न कजरे की धार ---

रत्नत्रयधारी मात , हम करते पद में धार |

चरणों में झुकाएं मात , चंदनामती माताजी के |
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- दिव्य पुष्पांजली -
पुष्पों की अंजलि भरकर , पुष्पांजलि पद में करके |
कुछ ज्ञान मुझे मिल जावे , और वरदहस्त मिल जावे |
हे माता, हम आये, द्वार तिहारे, कुछ दे दो आशीर्वाद |





-जयमाला-

तर्ज -आज हमारे दिल में अजब यह उलझन है ...

चन्दनामती माता की जयमाला गायेंगे |
झूम कर नर - नारी , नाचे और गायेंगे--२ |

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ग्यारस वर्ष की उम्र में , ब्रम्हचर्य व्रत लिया |
सन् 1971 से , सानिध्य माँ का पा लिया |
ईस्वीं सन् उन्निस सौ नवासी में दीक्षा ली |
और माधुरी से चन्दनामती बनी |
चन्दनामती माता की जयमाला गायेंगे |
झूम कर नर - नारी , नाचे और गायेंगे--२ ||१ ||

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इनने अनेकों भजन , और ग्रन्थ लिखे |
ये गुरुमाता की प्रेरणा से लिखे |
माँ ने हिंदी , अंग्रेजी संस्कृत में ग्रन्थ लिखें |
इसलिये टी.एम.यू ने पी . एच .डी की पदवी दी |
चन्दनामती माता की ....|
झूम कर नर - नारी ....||२ ||

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शांतिसागर से लेकर , सब आचार्यो को नमन |
उनकी प्रथम गणिनी ज्ञानमती माता को भी नमन |
माता ब्राहमी चन्दन बाला सम जोड़ी इनकी |
चंदनामती माता जी रत्नत्रय में रमती |
चन्दनामती माता की ....|
झूम कर नर - नारी ....||३ ||

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इनके प्रवचन में , ज्ञान का सार भरा |
इनकी कविताओं में , माधुर्य रस है भरा |
माता चरणों में दीपा की है प्रार्थना |
माता की छत्र-छाया में हमको भी रहना |
चंदनामती माता की जयमाला गायेंगे |
झूम कर नर - नारी , नाचे और गायेंगे--२||४ ||

ॐ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चन्दनामती मात्रे जयमाला पूर्णाघ्र्यं निर्वपामीति स्वाहा।

शांतये शांतिधारा, दिव्य पुष्पांजलि:।