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प्लास्टिक अपशिष्ट और हम

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प्लास्टिक अपशिष्ट और हम

वर्तमान में प्लास्टिक से निर्मित सामान तथा पॉलिथीन थैलियों का चलन लगातार बढ़ने के परिणामस्वरूप नगरों के घरेलू अपशिष्ट में पॉलिथीन व प्लास्टिक अपशिष्ट की मात्रा भी निरन्तर बढती जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप नाली/सीवर लाइनों के चोक होने, पर्यटक स्थलों पर पर्यावरणीय दुष्प्रभाव जानवरों द्वारा पॉलिथीन की थैलियाँ खाए जाने के अलावा अनेक पर्यावरणीय समस्याएँ भी परिलक्षित हो रही है।

प्लास्टिक अपशिष्ट का उद्गम सील—

घरेलू प्लास्टिक बैग, बोतल, कंटेनर आदि। अस्पताल इन्जेक्शन, सिरींज, ग्लूकोज बॉटल, रक्त एवं यूरिन थैलियाँ एवं दस्ताने आदि। होटल पच्किंग की वस्तुएं, पानी की बोतलें, प्लास्टिक की प्लेट, ग्लास, चम्मच आदि। वायु रेल, सड़क परिवहन पानी की बोतलें, प्लास्टिक की प्लेट, ग्लास, चम्मच एवं प्लास्टिक बैग आदि।

समस्याएँ—

प्लास्टिक पूर्ण रूप से अविघटनीय होता है तथा पर्यावरण में यह सौ वर्षों से अधिक समय तक बना रहता हैं पॉलिथीन का कचरा जमीन पर फैके जाने पर नष्ट नहीं होता है तथा लंबे समय तक बने रहने से जमीन की जल प्रवाहन एवं जलधारण क्षमता को विपरीत रूप से प्रभावित कर उत्पादन क्षमता घटाकर उसे बंजर बना देता है एवं भूमिगत जल के संवर्धन में बाधा उत्पन्न करता है। पॉलिथीन की यत्र–तत्र फैकी गई पन्नियाँ नालियों में फसकर दूषित जल के प्रवाह को रोक देती है, जिससे गंदगी नालियों से बाहर फैलने लगती है। पीने के पानी की लाइन में लीकेज होने पर यह पन्नियाँ वितरण के उपरान्त टूटी पाईप लाइन के अन्दर जाकर पुन: वितरण के समय जल अवरोध की स्थिति तथा प्रदूषण का कारण बनती हैं। घरेलू कचरे के साथ प्लास्टिक कचरा जलाए जाने पर यह डाई ऑक्सिन एवं फ्यूरेन जैसी विषैली गैसे उत्पन्न करता है जिससे श्वास रोग, कैंसर तथा मृत्यु तक हो सकती है। इससे उत्पन्न धुँए से बच्चों के स्वास्थ्य पर व्यस्क की तुलना में ६ गुना ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्लास्टिक की पन्नियों में भरकर खाद्य पदार्थ जूठन के रूप में फैक दिया जाता है, जिसको पालतू पशुओं द्वारा खाये जाने से यह पन्नियाँ आंतों में अवरोध उत्पन्न कर उनकी मृत्यु का कारण बनती है। सर्वेक्षण द्वारा ज्ञात हुआ है कि पन्नियों को खाने से प्रतिदिन ५ गायों की मौत हो रही है। पॉलीथीन कचरा जलाने पर ग्रीन हाउस गैसों को बढ़ावा देती है। परिणामत: ग्लोबल र्वािमग व ओजोन परत को क्षति पहुँचाती हैं

घरेलू कचरे एवं कृषि बागवानी कचरे से बनने वाली कंपोस्ट खाद की गुणवत्ता प्लास्टिक कचरे के कारण विपरीत रूप से प्रभावित होती है, जिससे वह हानिकारक अपशिष्ट में परिर्वितत हो जाता है।

यह अनुमानित है कि प्रतिवर्ष १.२ बिलियन प्लास्टिक केरी बेग बिना किसी शुल्क के खुदरा व्यवसायिों के द्वारा उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराए जाते हैं। परिणामस्वरूप अनावश्यक रूप से प्लास्टिक अपशिष्ट में वृद्धि हो रही है। रंगीन अथवा काले रंग की पालीथीन थैलियों में रखी गई खा़द्य सामग्री पन्नी के रंग के प्रभाव से दूषित हो जाती है और स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालती है। पॉलीथीन की थैलियाँ वजन में हल्की होने के कारण सार्वजनिक स्थानों को दूषित करती है पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों, बाग बगीचों, तालाब, पोखरों आदि का सौंदर्य नष्ट करतीहै एवं वहां मृदा को बंजर बनाती है।

निदान—

भावी पीढ़ी के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की रक्षा हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं पर ध्यान देकर एवं उसके अनुसार कार्यवाही कर आप पॉलीथीन के कचरे के नियंत्रण में अपना बहुमूल्य सहयोग दे सकते हैं।

न्यूनता—

घर से निकलते समय कागज, जूट अथवा कपड़े की थैली अवश्य साथ में रखे। दुकानदान द्वारा पॉलीथीन की थैली में सामान देने पर उसे हतोत्साहित करें तथा पॉलीथीन कचरे के दुष्प्रभावों की जानकारी भी उसे देवें। पॉलीथीन के बदले में कागज के लिफाफे के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करें। अपने आसपास पॉलीथीन विरोधी माहौल तैयार करें जिससे यह एक वृहद आन्दोलन का रूप ले सके और जनसामान्य पॉलीथीन का उपयोग स्वत: बंद कर सके। किसी भी प्रकार की पुन: चक्रित व रंगीन पॉलीथी में खाद्य पदार्थों का भंडारण/पैिंकग न करे एवं नैतिक दायित्वों का पालन करते हुए अन्य लोगों को रोके। पुन: चक्रित, रंगीन, खुरदुरी व छोटे आकार की पॉलीथीन थैलियों का बहिष्कार करें। बाजार से सुन्दरता के चक्कर में नित नये प्लास्टिक के बर्तन खरीदने के बजाय यथासंभव उपलबध धातु के बर्तनों का ही प्रयोग करें। अपने दैनिक जीवन में पॉलिथीन/प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का कम से कम उपयोग करें।

पुन: उपयोग—

अनेक छोटी प्लास्टिक बोतलें खरीदने के बजाय बड़ी बोतलें खरीदे। एक ही बोतल को पुनर्भरण के उपयोग में लाए। बुके में प्रयोग में की गई पॉलीथीन मोटी व पारदर्शी होती है। इसको फूलों के बुके से आराम से निकालकर साफ करके इसका पुस्तकों पर कवर चढ़ाया जा सकता है

पतली पॉलीथीन के छोटे छोटे टुकड़े की खेल खिलौने जैसे गुड़िया आदि में रबर या फोम के स्थान पर भरने में इनका उपयोग किया जा सकता है। मिनरल वाटर की बोतल को बीच में से काटकर ऊपर के भाग को अलग कर दें। नीचे का आधा भाग जो मिलेगा उसमें मिट्टी आदि भरकर पौधा लगाया जा सकता है अथवा नर्सरी के लिये बीज रोपकर इसमें पौधा भी तैयार किया जा सकता है। ऊपर के कटे हुए भाग को फनल की तरह प्रयोग किया जा सकता है। दीवाल पर हेंगिग शोभादार व फूलदान पौधों के लिए दीवार पर चिपका दिया जा सकता है।

दूध के पेकेट, मोटी पॉलीथीन, प्लास्टिक की बोतलें, डिब्बे, इन्हें एकत्रित कर रखते जाएं तथा बाद में इन्हें कबाडी को बेच दें। इससे आर्थिक लाभ भी होगा तथा साथ ही इससे कचरे में न फैकने से कचरे में कमी आएगी। आपके सहयोग से यह सामग्री कचरे में न जाकर पुर्नचक्रण के लिये भेजा जाना संभव हो सकेगा।

शादी व अन्य समारोह में प्लास्टिक के डिस्पोजेबल गिलास का अधिकता में उपयोग किया जाता है जो कि एक बार पानी पीने के बाद उपयोगी नहीं रह जाते हैं। इनकी संख्या सैकड़ों में होती है। इन गिलासों का उपयोग हम नर्सरी में पॉलीथीन के स्थान पर पौधा तैयार करने में कर सकते हैं। डिस्टेम्पर पेन्ट के प्लास्टिक के डिब्बों का प्रयोग बाल्टी की भाँति किया जा सकता है। प्लास्टिक की बाल्टी, टब, आदि टूट जाने पर इनका उपयोग गमलों के स्थान पर किया जा सकता है। अस्पतालों से निकलने वाली ग्लूकोस की प्लास्टिक की बोतलों से आकर्षक फ्लावर पॉट तैयार किये जा सकते हैंं

पुनर्चक्रीकरण—

यदि प्लास्टिक / पॉलीथी्ना कचरे को प्रभावी रूप से पृथक् कर लिये जाने की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जावे तो ऐसे प्लास्टिक को मोल्ंडीग की विशेष मशीनों की सहायता से प्लास्टिक ब्लाक्स के रूप में मोल्ड कर इन ब्लाक्स का उपयोग बिटूमिन तथा अन्य प्लास्टिक एडहेसिव के साथ मिलाकर सड़क निर्माण, डिवाइडर, विभिन्न चौराहों पर बनाये यातायात नियंत्रण चक्र तथा अन्य उचित स्थानों पर किया जा सकता है। नगर निगम / नगर पालिका द्वारा रखे गए कचरादानों में ही कचरा फैके और कचरे के समुचित प्रबंधन में सहयोग करें। अपने क्षेत्र में प्लास्टिक के पुर्नचक्रण का प्रसार करे एवं प्लास्टिक अपशिष्ट को एकत्रित कर छोटे पुर्नचक्रण इकाइयों तक पहुँचाने की व्यवस्था करे।

उपसंहार—

प्लास्टिक अपशिष्ट के उपचार कि तुलना में प्लास्टिक का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है, जो की २०३० तक १० गुना बढ़ जायेगा। यदि हम वर्तमान में प्लास्टिक के उपयोग को कम नहीं करेंगे तो भविष्य में यह एक गंभीर समस्या का रूप ले सकती है।

संकलन एवं प्रस्तुतीकरण, राजरतन
(जैनतीर्थवंदना वंदना अगस्त २०१४ )