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बच्चे और माहौल

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बच्चे और माहौल

श्रीमती अंजू जैन

१- अगर बच्चे आलोचना के माहौल में रहते हैं, तो वे निंदा करना सीख जाते हैं।

२- अगर बच्चे शत्रुता के माहौल में रहते हैं तो वे लड़ना सीख जाते हैं।

३- अगर बच्चे मखौल के माहौल में रहते हैं तो वे शरमाना सीख जाते हैं।

४- अगर बच्चे ईष्र्या के माहौल में रहते हैं, तो वे कुढ़ना सीख जाते हैं।

५- अगर बच्चे प्रोत्साहन के माहौल में रहते हैं तो वे आत्मविश्वास बनना सीख जाते हैं।

६- अगर बच्चे समर्थन के माहौल में रहते हैं तो वे खुद को पसंद करना सीख जाते हैं।

७- अगर बच्चे स्वीकृति के माहौल में रहते हैं तो वे दुनियां में प्रेम खोजना सीख जाते हैं।

८- अगर बच्चे सम्मान के माहौल में रहते हैं तो वे लक्ष्य बनाना सीख जाते हैं।

९- अगर बच्चे उदारता के माहौल में रहते हैं तो वे उदार बनना सीख जाते हैं।

१०- अगर बच्चे दोस्ती के माहौल में रहते हैं तो वे सीख जाते हैं कि दुनियां एक अच्छी जगह है।

११- अगर बच्चे सुख—शांति के माहौल में रहते हैं तो वे मानसिक सुख—शांति का सबके सीख जाते हैं।

१२- अगर बच्चे ईमानदारी और न्याय के माहौल में रहते हैं, तो वे ईमानदार और न्यायपूर्ण बनना सीख जाते है।


शुचि, मासिक जनवरी २०१५