बीते युगों में यहाँ पर, एक सती आई थी

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बीते युगों में यहाँ


तर्ज—सौ साल पहले......

बीते युगों में यहाँ पर, एक सती आई थी-२।
गजमोतियों की कथा, उसने बनाई थी।। टेक.।।

हस्तिनापुर की कन्या मनोवती बल्लभगढ़ ब्याही थी।
प्रतिज्ञा देवदर्शन की, सदा उसने निभाई थी।।
लज्जा के कारण उसने, बात नहिं बताई थी-२।
गजमोतियों की कथा......।।१।।

भरे भंडार मोती के, कभी उस बल्लभगढ़ में थे।
किन्तु दर्शन की निंदा से, सेठ भी बने भिखारी थे।।
परिवार ने बेटे के, संग बहू निकाली थी-२।
गजमोतियों की कथा......।।२।।

सती की उस प्रतिज्ञा से, देव आसन भी कांपे थे।
रत्नपुरि में वे मंदिर और मोती देने आते थे।।
सात उपवासों को करके, महिमा दिखाई थी-२।
गजमोतियों की कथा......।।३।।

पति-पत्नी ने मंदिर एक, रत्नपुरि में बनाया था।
वहीं फिर बल्लभगढ़ वालों से मिलने का क्षण आया था।।
दर्शन प्रतिज्ञा तब से, सबने निभाई थी-२।
गजमोतियों की कथा......।।४।।

यह कहानी प्रभू दर्शन की, महिमा को बताती है।
आत्मज्योती जलाने में, भक्ति ही काम आती है।।
‘‘चन्दनामती’’ यह महिमा, शास्त्रों में गाई थी-२।
गजमोतियों की कथा......।।५।।

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