भक्ती की भर ली गगरिया

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भक्ती की भर
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तर्ज—हमरी गुलाबी चुनरिया......

भक्ती की भर ली गगरिया, कि भव पार कर दो संवरिया।। टेक.।।

क्षीर समुद्र से जल भर लाए-२
रिमझिम सी बरसे बदरिया, कि भव पार कर दो सांवरिया।।१।।

इन्द्राणी प्रभु का तन अंगोछे-२
लेकर शुद्ध चदरिया, कि भव पार कर दो सांवरिया।।२।।

ऐरावत हाथी पे बिठाया-२
पांडुक वन की डगरिया, कि भव पार कर दो सांवरिया।।३।।

चरण ‘चंदना’ ध्यान लगाए-२
पार लगा दो नवरिया, कि भव पार कर दो सांवरिया।।४।

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