Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


ॐ ह्रीं केवलज्ञान कल्याणक प्राप्ताय श्री विमलनाथ जिनेन्द्राय नमः |

भजन संग्रह भाग - 04

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज



कजरारे कजरारे

नमन कराया सहन से

गुण गा रे गुण गा रे

गोमटेश जाऊंगा

गुरु के गुण गाओ

चली चली देखो सेना चली

आये हो गुरुवर महावीर बन के

मेरा सांवली पारस

महावीर की वाणी

लड्डू चदौं जी करदा

उमरिया रह गई

तेरे मस्तक नाग

चंद्र प्रभु दिखलाओ

चंदन पुर के

णमोकार महा मंत्र

जय जिनेन्द्र बोलो

तेरे पांच

जय आदि देव

सांवलिया पारस नाथ

मेरा जैन धरम

वीरा मेरे वीरा

हट जा पुजारी

मैना रानी

जरे जरे

मेरे बंद किस्मत

जैन धरम

जहन महावीर

तारा है सारा

इ स्वामी तेरे भक्त

मंगलाष्टक स्त्रोत हिंदी

वासी चालीसा

हम यहै कामना

गुरुदेव आये शरण हम

चली चली देको सेना चली

दुक्खों में आराम पायेगा

गुरुवर हमारे भोले बाबा

जय गुरु देव जय गुरु देव

चंदा प्रभु के दर्शन

जनवाणी आत्मज्ञान देती है