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दिव्यशक्ति ब्राह्मी-सुंदरी स्वरूपा गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास अवध की धरती जन्मभूमि टिकैतनगर में 15-7-19 से प्रारंभ हुआ |

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भजन संग्रह भाग - 04

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कजरारे कजरारे

नमन कराया सहन से

गुण गा रे गुण गा रे

गोमटेश जाऊंगा

गुरु के गुण गाओ

चली चली देखो सेना चली

आये हो गुरुवर महावीर बन के

मेरा सांवली पारस

महावीर की वाणी

लड्डू चदौं जी करदा

उमरिया रह गई

तेरे मस्तक नाग

चंद्र प्रभु दिखलाओ

चंदन पुर के

णमोकार महा मंत्र

जय जिनेन्द्र बोलो

तेरे पांच

जय आदि देव

सांवलिया पारस नाथ

मेरा जैन धरम

वीरा मेरे वीरा

हट जा पुजारी

मैना रानी

जरे जरे

मेरे बंद किस्मत

जैन धरम

जहन महावीर

तारा है सारा

इ स्वामी तेरे भक्त

मंगलाष्टक स्त्रोत हिंदी

वासी चालीसा

हम यहै कामना

गुरुदेव आये शरण हम

चली चली देको सेना चली

दुक्खों में आराम पायेगा

गुरुवर हमारे भोले बाबा

जय गुरु देव जय गुरु देव

चंदा प्रभु के दर्शन

जनवाणी आत्मज्ञान देती है