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ॐ ह्रीं जन्म-तप कल्याणक प्राप्ताय श्री विमलनाथ जिनेन्द्राय नमः |

भजन संग्रह भाग - 06

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प्रज्ञा श्रमणी मात चंदानामती

नवकार मंत्र स्तुति

भक्ति की हें रात

पलकें ही पलकें बिछायेंगे

गुण सौरभ से रहे महकता

मंदिर में रहते हो भगवान

आँखें बंद करूं या खोलूँ

जियो और जीने दो

प्रभु आ जाओ एक बार

भक्त हो या भगवान

नवकार जपो सारे

जिया कब तक उलगेगे

नही जीतना हें इस मन को

दुनिया से सहारा क्या लेना

मुजे दे देना सहारा प्रभु मेरे

माँ की महिमा गाते हें

वीर मेरे हो वीर मेरे

ऋषभ जिनंदा दर पे तेरे आये

धूप में परछाई में

शांति प्रभु के गुण गाओ

कभी खुशियाँ भी लाये

मुछाला महावीर व्हाला

आया तेरा बुलावा आदिनाथजी

ओ करुणासागर ओ त्रिशला नंदन

उड़जा मेरे मानव तू तो

पार्श्व के ध्यान से हम तिरने लगे

कभी पार्श्व बनके कभी वीर बनके

दिवो रे दिवो मांगलिक दिवो

पुजारी आडो खोल दर्शन

विनती मेरी हा विनती मेरी