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ॐ ह्रीं जन्म-तप कल्याणक प्राप्ताय श्री विमलनाथ जिनेन्द्राय नमः |

भजन संग्रह भाग - 07

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तुझमें प॒भु दिखता है

चौक पूरयति

गुरुवर को रहने दो

डी ओ मेरे गुरुवर

गुरु के द्वार चलो

डी गुरुवर ओ गुरुवर

आंख बंद करके

गुरु चरण में नमन

डाओ बतलाऊ

होले होले दया मिलती है

तेरा ठिकाना

गूंज रहा है जय जय कार

द्वार पे आके

आये गौ मेरे गुरुवार

चंद्खेदी

सोडे शिकर पे

गोमटेश कब ध्यान दोगे

झलक दिखलाजा

संसार के सागर में

चलो ना चलो चंदा प्रभु

गुरु देव के गमन से मनन

बिछडेंगे फिर हम

शिखर जी के द्वार हम चले

परिचय

बाबा मेरा सावलिया

शिखर जी किंग

मधुवन जी में मौज ही मौज

दुलहन सा सजा है शिखर जी

पारस बाबा मिल जायेंगे

तेरा दीवाना आया है मधुवन

नगाडा नगाडा बजा

जैन इज किंग

गुरु चरण में मौज ही मौज

कुण्डलपुर ये गुलाब सा लगे

मेरे अंगना पधारो

चम् चम् रोई अँखियाँ

छोटे बाबा आहार को चले

टुक टुक देखें

ज़ूम बराबर