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दिव्यशक्ति ब्राह्मी-सुंदरी स्वरूपा गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास अवध की धरती जन्मभूमि टिकैतनगर में 15-7-19 से प्रारंभ हुआ |

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भजन संग्रह भाग - 08

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चरणों में धायु तेरे

एक पंखी आवी ने उडी गयो

कोई नहीं मेरा तू पालनहार

नेमजी की निकली सवारी

पार्श्व परभू का दरबार हें

नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का

छोटी छोटी अँखियाँ छोटे छोटे बाल

आ जो जमन जाया वीर

चालो जी सिद्धाचल चालो

पार्श्व प्रभु का शरण मिला हें

सारी उमर सोता रहा

वामा दुलारे सबके सहारे

विमलाचल वासी मेरी

जय जय आरती आदि जिनंदा

द्वारे तेरे ही आये-दीपाली सोमैया

शीतल जैसे चन्दन-कर्णिका शाह

पल पल बीते उमरिया-अमेय दाते

सोना माँ सुगंध भले-किशोर मनराजा

नवकार मंत्र हें महानमंत्र अमेय डेट भावना पंडित

आदत बुरी सवारलो-अमेय दाते

जपो नित्य मंत्र नवकार-अमेय दाते

गाड़ी छोडकर पैदल जाना-विवेक नाईक

मेरे अन्तर्यामी रे-विवेक नाईक

ऊचे ऊचे पर्वत पर-सोनल नाईक

मेरा कोई न सहारा-शीतल मेहता

श्रद्धा के सुमन-विवेक नाईक

गुण गीत गाऊँ-भावना पंडित

ओ जिनेश्वर देव-संजय शाह

जय बोलो प॒भुवर जी

विनती मेरी हो विनती मेरी

हे संयम उसको मिले

पार्श्व के ध्यान से हम

तेरा मेरा रिश्ता पुराना

जो एक नजर डालो

चलो चलो दादा के द्वार

पायो जी मैंनें

जा संयम पथ पर जा

प॒भु अपनी नगरिया में

भक्ति करता छुटे मारा प्राण

ऐसी दशा हो भगवंत

वो जैन धर्म है मेरा

मेरे मालिक पारस प्रभु