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२७ अप्रैल से २९ अप्रैल तक ऋषभदेवपुरम् मांगीतुंगी सिद्धक्षेत्र में लघु पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आयोजित की गई है |

२५ अप्रैल प्रातः ६:४० से प्रतिदिन पारस चैनल पर पूज्य श्री ज्ञानमती माताजी के द्वारा षट्खण्डागम ग्रंथ का सार प्रसारित होगा |

भजन संग्रह भाग - 13

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बढ़ाओ बेटी को

त्वम् गोम्मटेशम पणमामि णिच्चं

भारत की बेटी को

जन्म मानव का पाया है जो

जप लो प्रभु का नाम

मानव जीवन है ब्यूटीफुल

मेरे प्यारे भाई बहन

जय जय ऋषभदेव

मांगीतुंगी पिलग्रिमेज

आजके मानवमें कलियुग का

अरे जग जा रे चेतन

इस युग के पहले गुरुवर

सन्तो का तुम्हे नमन

गणिनी ज्ञानमती माताजी पे अभिमान करो रे

ज्ञानमति माँ आईं प्रभु जी के द्वार

चंदना सुनाती

ओ मदर मुझे दे दो कुछ नॉलेज

शरद पूनो का ये चाँद हैं

ज्ञानमती माताजी की

ज्ञानमती मात के पड़ गये हैं जो चरण

ज्ञानमती माताजी हैं ज्ञान की सागर

यह शान्त छवि

यू आर टू मच नाइस

है ज्ञानमती माता के युग की ये चंदना

प्रभू गर्भ कल्याण में

स्वर्गो में बाज उठे

पंखिड़ाहो पंखिड़ा

ज्ञानमती माता आई मांगीतुंगी तीर्थ पर

गणिनी ज्ञानमती माताजी पर अभिमान करो रे

मस्तकाभिषेक तीन मूर्ति प्रभु का

मुंबई नगर में चमका

मुंबई शहर का तीर्थ

मुम्ब्रा के प्रभु बाहुबली

रंग छलके

मधुवन के मंदिरों में

नाम तुम्हारा

चौबीस तीर्थंकर अमृतवाणी

अरे माता बहिनों

बिछड़ने का फिर से वो पल आ गया

चल तुझे

चला चल गुरु की

चलो करे हम

देना हो तो दीजिए

देव दर्शन स्तोत्र
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ढ़ोल बजाकर बोल बाबा मेरा
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एक डोली उठी एक अर्थी उठी

गुरु के बिना ये मेरा जीवन वीराना

हाँ तुम भी बोलो

लिखा है ऐसा लेख

जय सौभाग्य सागर की

जय वीतराग विज्ञान

जीवन है पानी की बूँद2

जीवन है पानी की बूँद1

ले चल मोहे

महा मृत्युंजय जाप्य

मंगलाषटक स्तोत्र

मेरी भावना

पारस रे तेरी कठिन डगरिया

प्रभु पतित पावन

राजा राणा छत्रपति

समाधि भावना

सर्व शांति मंत्र जाप्य

तुमसे लागी लगन