भोले प्राणी

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भोले प्राणी


तर्ज—फिरकी वाली......

भोले प्राणी!
तेरी दुनिया में, है सब कुछ नश्वर, न कुछ अविनश्वर, शरीर भी न तेरा है।
फिर भी सबको तू कहे मेरा मेरा है।। टेक.।।

टंकोत्कीर्ण अमूर्तिक केवल, आत्मतत्व है अविनश्वर।
उससे जुड़े वचन मन काया, का व्यापार सभी नश्वर।।
क्षणभंगुर हैं जीवन के क्षण, मिले नहीं अक्षय कण,
तू है ज्ञानी, आत्मविज्ञानी, तत्वश्रद्धानी, शुद्धात्म तत्व तेरा है।
फिर भी सबको तू कहे मेरा मेरा है।।१।।

एकेन्द्रिय से पंचेन्द्रिय तक, जीव अनन्तानन्त कहे।
हैं व्यवहार से संसारी सब, निश्चय से परमात्म रहें।।
सूर्योदय से भगे अंधेरा,फैले स्वर्ण उजेरा।
यूँ ही ध्यानी, तू सुन प्रभु वाणी, परमकल्याणी, मिटे भव फेरा है।
फिर भी सबको तू कहे मेरा मेरा है।।२।।

अध्यातमवादी बनकर, व्यवहार क्रियाएँ मत छोड़ो।
पाप त्याग से पूर्व ‘चंदना’, पुण्य से नाता मत तोड़ो।।
सत्यम शिवम् सुन्दरम् को, पाने का यही है साधन,
हे श्रुतज्ञानी, न बन अज्ञानी, समझ सुन प्राणी, कर्मों ने डाला डेरा है।
फिर भी सबको तू कहे मेरा मेरा है।।३।।

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