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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास टिकैतनगर-बाराबंकी में चल रहा है, दर्शन कर लाभ लेवें |

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें जिनाभिषेक एवं शांतिधारा पुन: ज्ञानमती माताजी - चंदनामती माताजी के प्रवचन ।

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जैन इनसाइक्लोपीडिया
जैन विश्वकोश
जैनधर्म के ज्ञान का महासागर


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प्रज्ञाश्रमणी श्री चंदनामती माताजी के द्वारा रक्षाबंधन की कथा
प्रमुख विषय


जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



ज्योतिष-वास्तु एवं मंत्र विद्या· जैन भूगोल· जैन इतिहास· श्रावक संस्कार· ग्रन्थ भण्डार

आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक


आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-१
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-२
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-३
आचार्य श्री शान्तिसागर काव्य कथानक भाग-४

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भाद्रपद माह के व्रत एवं पर्व


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भगवान पार्श्वनाथ निर्वाण उत्सव पर टिकैतनगर बाराबंकी में तीर्थराज सम्मेद शिखर की अद्भुत रचना
विदेश में धर्मप्रभावना के कतिपय अमूल्य क्षण


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कुन्दकुन्द मणिमाला


गाथा - 1

परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी द्वारा पारस चैनल के माध्यम से श्री कुंदकुंद मणिमाला का अध्ययन कराया जा रहा है । अतः पूज्य माताजी द्वारा पढ़ाई गई अब तक की गाथा के ऑडियो सुनने लिए इस लिंक को खोलें।

पुस्तक पढने के लिए क्लिक करें...

विश्व शांति केंद्र स्थापना


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विदेशी शोधार्थीगण : सीखा जैन भूगोल


*जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर पधारे विदेशी शोधार्थीगण : सीखा जैन भूगोल*
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विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जैनधर्म का अध्ययन करने हेतु अनेक शोधार्थियों ने दिनाँक 16-17 जुलाई 2019 को जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर तीर्थ पधारकर जैन भूगोल की अद्वितीय रचनाओं-जम्बूद्वीप, तेरहद्वीप, तीन लोक तथा तीर्थ के समस्त जिनमंदिरों का दर्शन करके अत्यन्त हर्ष का अनुभव किया। उन्होंने जैनधर्म के अनुसार *पृथ्वी की संरचना, तीनलोक में नरक-स्वर्ग, सिद्ध स्थान तथा मनुष्य लोक की प्रत्यक्ष रचना देखकर जैन भूगोल को समझा।*👆

इंटरनेशनल समर स्कूल फॉर जैन स्टडीज के माध्यम से *इस अवसर पर लॉस एंजिल्स, हवाई, शिकागो, कोलम्बिया, जापान, कनाडा, जर्मनी, फ्लोरिडा, यू.एस.ए. आदि युनिवर्सिटी से शोधार्थीगण उपस्थित हुए।*👆

विशेषरूप से 16 जुलाई को सायंकाल सभी शोधार्थियों ने कमल मंदिर में विराजमान *भगवान महावीर स्वामी की आरती करके महान खुशी का अनुभव किया।*

इस अवसर पर जम्बूद्वीप संस्थान के मंत्री पं. विजय जैन साथ में पं. नरेश जैन, पं. वीरेन्द्र जैन आदि द्वारा पधारे सभी विदेशी अतिथियों का भावभीना स्वागत सत्कार करके आतिथ्य प्रदान किया गया। सभी शोधार्थियों को *टिकैतनगर में विराजमान गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने परोक्ष से ही अपना मंगल आशीर्वाद भी प्रेषित किया।*

  • -डा. जीवनप्रकाश जैन, जंबूद्वीप*
समाचार


गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी संघ की दैनिक चर्या

  • प्रातः 5:00 बजे - उषा वंदना
  • प्रातः 5:15 बजे - योग प्राणायाम एवं ध्यान की क्लास (पूज्य प्रज्ञा श्रमणी आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी द्वारा)
  • प्रातः 6:00 से 7:00 - पारस चैनल के सीधे प्रसारण में भगवान का पंचामृत अभिषेक व पूज्य माता जी के प्रवचन
  • प्रातः 7:00 बजे - गुरु वंदना
  • प्रातः 7:45 बजे - तत्वार्थ सूत्र क्लास
  • प्रातः 9:30 बजे - संघ की आहार चर्या
  • मध्यान्ह 12:00 से 3:00 तक - सामयिक, विश्राम एवं निजी अध्ययन - स्वाध्याय
  • मध्यान्ह 3:00 से 4:00 बजे तक - गौतम गणधर वाणी का स्वाध्याय एवं आप्तमीमांसा की क्लास
  • मध्यान्ह 4:00 बजे से - बालक एवं बालिकाओं के लिए शिक्षाप्रद क्लास (बेसिक शिक्षा क्लास)
  • सांय 6:00 से 6:30 तक - प्रतिक्रमण एवं गुरु वंदना
  • रात्रि 8:00 बजे - मंगल आरती (भगवान एवं पूज्य माता जी की )
  • रात्रि 8:30 बजे - द्रव्य संग्रह की कक्षा (पूज्य स्वामी जी द्वारा )
  • रात्रि 9:00 बजे - बाल संघ, बालिका संघ, महिला मंडल के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम / प्रतियोगिता आदि

विशेष

प्रत्येक रविवार को मध्यान्ह 3:00 बजे से बालक बालिकाओं को इंटरनेट पर जैन इनसाइक्लोपीडिया सिखाया जाएगा |

पवार पॉइंट प्रजेंटेशन


कुछ नए प्रजेंटेशन्स

सम्यग्ज्ञान पत्रिका


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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सोलहकारण व्रत


सोलहकारण व्रत

मेघमाला और षोडशकारण व्रत दोनों ही समान हैं। दोनों का आरंभ भाद्रपद कृष्णा प्रतिपदा से होता है परन्तु षोडशकारण व्रत में इतनी विशेषता है कि इसमें पूर्णाभिषेक आश्विन-कृष्णा प्रतिपदा को होता है, ऐसा नियम है। कृष्णा पंचमी तो नाम से ही प्रसिद्ध है।

जम्बूद्वीप संबंधी भरतक्षेत्र के मगध (बिहार) प्रांत में राजगृही नगर है। वहाँ के राजा हेमप्रभ और रानी विजयावती थी। इस राजा के यहाँ महाशर्मा नामक नौकर था और उनकी स्त्री का नाम प्रियंवदा था। इस प्रियंवदा के गर्भ से कालभैरवी नामक एक अत्यन्त कुरुपी कन्या उत्पन्न हुई कि जिसे देखकर माता-पितादि सभी स्वजनों तक को घृणा होती थी।

एक दिन मतिसागर नामक चारणमुनि आकाशमार्ग से गमन करते हुए उसी नगर में आये, तो उस महाशर्मा ने अत्यन्त भक्ति सहित श्री मुनि को पड़गाह कर विधिपूर्वक आहार दिया और उनसे धर्मोपदेश सुना। पश्चात् जुगल कर जोड़कर विनययुक्त हो पूछा-हे नाथ! यह मेरी कालभैरवी नाम की कन्या किस पापकर्म के उदय से ऐसी कुरुपी और कुलक्षणी उत्पन्न हुई है, सो कृपाकर कहिए? तब अवधिज्ञान के धारी श्री मुनिराज कहने लगे, वत्स! सुनो- उज्जैन नगरी में एक महिपाल नाम का राजा और उसकी वेगावती नाम की रानी थी। इस रानी से विशालाक्षी नाम की एक अत्यन्त सुन्दर रूपवान कन्या थी, जो कि बहुत रूपवान होने के कारण बहुत अभिमानिनी थी और इसी रूप के मद में उसने एक भी सद्गुण न सीखा। यथार्थ है-अहंकारी (मानी) नरों को विद्या नहीं आती है।

व्रत विधि पढ़ने के लिए क्लिक करें

वर्षायोग २०१९


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भजन


तर्ज-तुम करो प्रभु से प्यार........(तुम करो पंचकल्याण)]]



आई दीक्षा जयंती आज ...

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आई दीक्षा जयंती आज, प्रज्ञाश्रमणी की।
चंदनामती जी मात, प्रज्ञाश्रमणी की।
करो सब मिल जय जयकार, प्रज्ञाश्रमणी की।।
ज्येष्ठ बदी मावस की तिथि की।
मोहिनी ने कन्या जन्मी थी।
माधुरी वही हैं आज, प्रज्ञाश्रमणी जी।।१।। आई............

प्रथम बार गुरु दर्शन पाए।
गोम्मटसार श्लोक सुनाए।।

वही बनीं आर्यिका मात, प्रज्ञाश्रमणी जी।।२।।आई.........

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कुछ पुरानी यादें


'
प्रज्ञाश्रमणी चंदनामती माताजी की पूजा


प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी की पूजन

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-स्थापना-
तर्ज ....तेरी रसके कमर ....

चलो भक्तों चलो , माता के दर चलो , चलकर पूजा रचाये , मजा आ गया |
आज पूजा करी , चंदनामतीजी की , मैंने पूजा रचाई , मजा आ गया |
ज्ञानमती जी की शिष्या है प्रज्ञाश्रमणी , इनने ज्ञान का अमृत लिया मात से -२
चन्दन से भी शीतल इनकी वाणी मधुर , इनकी वाणी सुनी तो मजा आ गया -२ |

चलो भक्तों चलो ......
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ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मातः अत्र अवतर-अवतर संवौषट् आव्हाननं |
ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मातः अत्र तिष्ठ-तिष्ठ ठः-ठः स्थापनं |

ऊँ ह्रीं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती मातः अत्र मम सन्निहितो भव्-भव् वषट् सन्निधीकरणं स्थापनं |

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ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


भारत गौरव गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के

दीक्षित जीवन के 67 चातुर्मास (1953-2019)

*वर्ष 1953 टिकैत नगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1954 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1955 महेश्वर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1956 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1957 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1958 ब्यावर (राजस्थान)

*वर्ष 1959 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1960 सुजानगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1961 सीकर (राजस्थान)

*वर्ष 1962 लाडनूं (राजस्थान)

*वर्ष 1963 कोलकाता (पश्चिम बंगाल)

*वर्ष 1964 हैदराबाद (आंध्र प्रदेश)

*वर्ष 1965 श्रवणबेलगोला (कर्नाटक)

*वर्ष 1966 सोलापुर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1967 सनावद (मध्य प्रदेश)

*वर्ष 1968 प्रतापगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1969 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1970 टोंक (राजस्थान)

*वर्ष 1971 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1972 दिल्ली (पहाड़ी धीरज)

*वर्ष 1973 दिल्ली (नजफगढ़)

*वर्ष 1974 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1975 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1976 खतौली (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1977 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1978 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1979 दिल्ली (मोरी गेट)

*वर्ष 1980 दिल्ली (कूचा सेठ)

*वर्ष 1981 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1982 दिल्ली (मोदी धर्मशाला)

*वर्ष 1983 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1984 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1985 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1986 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1987 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1988 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1989 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1990 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1991 सरधना (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1992 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1993 अयोध्या (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1994 टिकैतनगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1995 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1996 मांगी तुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1997 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1998 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1999 दिल्ली (कनॉट प्लेस)

*वर्ष 2000 दिल्ली (प्रीत विहार)

*वर्ष 2001 दिल्ली (अशोक विहार)

*वर्ष 2002 प्रयाग इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 2003 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2004 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2005 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2006 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2007 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2008 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2009 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2010 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2011 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2012 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2013 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2014 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2015 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2016 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2017 मुंबई (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2018 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2019 टिकैतनगर (उ.प्र.)

चातुर्मास के विषय में पढ़ें

आज का दिन - १८ अगस्त २०१९ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक १८ अगस्त,२०१९
तिथी- भाद्रपद कृष्ण ३
दिन- रविवार
वीर निर्वाण संवत- २५४५
विक्रम संवत- २०७६

सूर्योदय ०६.०७
सूर्यास्त १८.५६


अथ भाद्रपद मास फल विचार


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अयोध्या विहार 2018


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