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२५ अक्टूबर २०१९ तक गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का दरियाबाद (उ.प्र) में प्रवास रहेगा |

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें जिनाभिषेक एवं शांतिधारा पुन: ज्ञानमती माताजी - चंदनामती माताजी के प्रवचन ।

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आचार्य श्री वीरसागर काव्य कथानक


आचार्य श्री वीरसागर काव्य कथानक भाग-१
आचार्य श्री वीरसागर काव्य कथानक भाग-२
आचार्य श्री वीरसागर काव्य कथानक भाग-३
आचार्य श्री वीरसागर काव्य कथानक भाग-४

और देखें...

आचार्य शांतिसागर मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष 2019-2020


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4 वर्ष 9 महीने की निर्जरा जैन द्वारा धर्म प्रभावना
मंगल त्रयोदशी (धनतेरस) व्रत


मंगल त्रयोदशी (धनतेरस) व्रत एवं कथा

व्रतविधि-कार्तिक कृष्णा १२ के दिन इन व्रतिकों को एक भुक्ति करना चाहिए। त्रयोदशी को प्रात:काल में शुचिजल से अभ्यंग स्नान (शिर से स्नान) करके नवधौतवस्त्र धारण करना चाहिए। सब पूजाद्रव्य हाथ में लेकर मंदिर में जाकर जिनालय की तीन प्रदक्षिणा देकर ईर्यापथशुद्धिपूर्वक श्रीजिनेन्द्र की भक्ति से वंदना करना, वेदी पर श्री विमलनाथ तीर्थंकर की प्रतिमा पातालयक्ष और वैरोटी यक्षी सह स्थापित करके उनका पंचामृत से अभिषेक करना। एक पाटे पर क्रम से १३ पान रखकर उस पर अक्षत, फल, पूâल रखकर श्री आदिनाथ से विमलनाथ तक १३ तीर्थंकरों की अष्टद्रव्य से अर्चना करना। श्रुत और गणधर उनकी पूजा करके यक्ष-यक्षी की अर्चना करना। क्षेत्रपाल को तैलाभिषेक करके सिंदूर लगाना। उसके आगे पाँच पान रखकर इस पर अक्षत, फल, फूल रखकर गंध, पुष्प की माला, वस्त्र, खोपरे की कटोरी (गरी का गोला आधा लेना), गुड़, लड्डू, वगैरह अर्पण करना। अष्टक, स्तोत्र, जयमाला क्रम से बोलकर यथाविधि अर्चन करना चाहिए। तेल की पाँच-पाँच पूरन पूरी के पाँच नैवेद्य चढ़ाना। बाद में ‘‘ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं विमलनाथ तीर्थंकराय पाताल यक्ष वैरोटी यक्षी सहिताय नम: स्वाहा।’’ इस मंत्र से १०८ पुष्प चढ़ाना। णमोकार मंत्र का १०८ बार जप करना, यह व्रत कथा पढ़ना। एक थाली में तेरह पान रखकर उस पर अष्टद्रव्य, श्रीफल रखना और महाघ्र्य से जिनालय की तीन प्रदक्षिणा करके मंगल आरती उतारना। इस दिन उपवास करके ब्रह्मचर्यपूर्वक धर्मध्यान में समय बिताना। सत्पात्र को आहारदान देना। उपवास करने की शक्ति नहीं है तो तीन वस्तु का नियम लेकर एकभुक्ति करना। इस प्रकार १३ मास तक उस तिथी में पूजा करके अंत में उसका उद्यापन करना। उस समय श्री विमलनाथ तीर्थंकर विधान महाभिषेक से करना। चतु:संघ को चतुर्विध दान देना। ऐसी इस व्रत की पूरी विधि है।

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दीपावली पूजा


चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पूजन


चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पूजन

रचयित्री-प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती

-स्थापना-

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पूजन करो रे,
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श्रीशान्तिसिन्धु आचार्य प्रवर की, पूजन करो रे-२।
भारतवसुन्धरा ने जब, मुनियों के दर्श नहिं पाये।
सदी बीसवीं में तब श्री, चारित्रचक्रवर्ती आए।।
दक्षिण भारत भोजग्राम ने, एक लाल को जन्म दिया।
उसने ही सबसे पहले, मुनिपरम्परा जीवन्त किया।।
मुनिपरम्परा जीवन्त किया।।
पूजन करो रे,
श्रीशान्तिसिन्धु आचार्य प्रवर की, पूजन करो रे-।
ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्ती श्रीशान्तिसागरप्रथमाचार्यवर्य ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्ती श्रीशान्तिसागरप्रथमाचार्यवर्य ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनं।

ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्ती श्रीशान्तिसागरप्रथमाचार्यवर्य ! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणम्।

अष्टक

(तर्ज- तीरथ करने चली सती.......)

दीक्षा लेकर बने मुनि, निज कर्मकलंक जलाने को। कैसे होते हैं मुनिवर, यह बतला दिया जमाने को।।बतला....
सागर सम गंभीर तथा, गंगा जल सम शीतल वाणी।
जीवन में साकार किया, प्रभु कुन्दकुन्द की जिनवाणी।।
ऐसे गुरु के पद में आए, हम जलधार चढ़ाने को,
हम जलधार चढ़ाने को।। दीक्षा लेकर....

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ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्ती प्रथमाचार्यश्रीशान्तिसागराय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं निर्वपामीति स्वाहा।

पूरी पूजा पढ़ें

वैराग्य भावना


वैराग्य भावना-वज्रनाभि चक्रवर्ती की

-दोहा-

बीज राख फल भोगवै, ज्यों किसान जग माहिं।
त्यों चक्री नृप सुख करे, धर्म विसारै नाहिं।।१।।
-जोगीरासा वा नरेन्द्र छंद-
इहविधि राज करै नरनायक, भोगै पुण्य विशालो।
सुखसागरमें रमत निरंतर, जात न जान्यो कालो।।
एक दिवस शुभ कर्म-संजोगे, क्षेमंकर मुनि वंदे।
देख शिरीगुरु के पदपंकज, लोचन अलि आनंदे।।२।।

तीन प्रदक्षिण दे शिर नायो, कर पूजा थुति कीनी।
साधु-समीप विनय कर बैठ्यो, चरननमें दिठि दीनी।।
गुरु उपदेश्यो धर्म-शिरोमणि, सुन राजा वैरागे।
राजरमा वनितादिक जे रस, ते रस बेरस लागे।।३।।

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गणिनी ज्ञानमती बारहमासा


गणिनी ज्ञानमती बारहमासा


तर्ज-मुक्तिपथ का पथिक...
बारहमासा सुनो ज्ञानमती मात का,
जिनने निज में समाया सभी मास को।
सारा संसार विषयों का स्वादी बना,
तब ये तज कर चलीं सब विषय आश को।।१।।
चैत्र महिना बसन्ती गुलाबी ऋतू,
जिसको नर नारी कहते हैं अपना हितू।
कृष्ण एकम को तुम क्षुल्लिका बन गयीं
षोडशी सोलहकारण व्रती बन गयीं।
चैत्र का मास सचमुच सफल हो गया,
क्योंकि तुममें समा ही गया मास वो।।१।।
बारहमासा........
मास वैशाख में ग्रीष्म ऋतु आ गई,
पेय द्रव्यों की ठण्डी बहारें चलीं।

कृष्ण दुतिया को तुम आर्यिका बन गईं,
ज्ञान की ऐसी ठण्डी फुहारें चलीं।
मास वैशाख सचमुच सफल हो गया,
आर्यिका ज्ञानमतिमय बना मास वो।।२।।

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कुन्दकुन्द मणिमाला


गाथा - 1

परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी द्वारा पारस चैनल के माध्यम से श्री कुंदकुंद मणिमाला का अध्ययन कराया जा रहा है । अतः पूज्य माताजी द्वारा पढ़ाई गई अब तक की गाथा के ऑडियो सुनने लिए इस लिंक को खोलें।

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सम्यग्ज्ञान पत्रिका


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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वर्षायोग २०१९


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टिकैतनगर बाराबंकी में आयोजित शरद पूर्णिमा महोत्सव 2019 में आयोजित गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 86 वें महा जन्म जयंती के अवसर पर दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान का सर्वोच्च पुरस्कार गणिनी ज्ञानमती पुरस्कार से सम्मानित श्री पराग जैन आईएएस मुंबई कार्यक्रम की अध्यक्षता सर्वश्री प्रदीप जैन पीएनसी आगरा एवं मुख्य अतिथि कुलाधिपति श्री सुरेश जैन मुरादाबाद संघ पति श्री अनिल जैन प्रीत विहार दिल्ली |

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आचार्य श्री वीरसागर महाराज की पूजन


आचार्य श्री वीरसागर महाराज की पूजन


-प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी
स्थापना-(नरेन्द्र छन्द)
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महावीर पथ के अनुयायी, वीरसिन्धु आचार्यप्रवर।
शान्ति सिन्धु के प्रथम शिष्य, आर्यिका ज्ञानमति के गुरुवर।।
उन गुरु शिष्य की गरिमा से, लगता है यह अनुमान सहज।
तुम थे असली रत्नपारखी, दृष्टि तुम्हारी सदा सजग।।१।।

उन आचार्य वीरसागर की, पूजा आज रचाऊं मैं।
आह्वानन स्थापन करके, अपने निकट बुलाऊँ मैं।।
हे गुरुवर! मम हृदय विराजो, अभिलाषा यह है मेरी।
पुष्पों की अंजलि भरकर के, करूँ थापना मैं तेरी।।२।।

-दोहा-

गुरुपूजा बस एकली, गुरुपद देन समर्थ।
भवदधि नौका सम यही, शेष सभी कुछ व्यर्थ।।३।।

ॐ ह्रीं श्रीवीरसागराचार्यवर्य ! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं श्रीवीरसागराचार्यवर्य ! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनं।
ॐ ह्रीं श्रीवीरसागराचार्यवर्य ! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।

-अष्टक-

जग के शीतल स्वादिष्ट पेय से, प्यास नहीं बुझ पाई है।
अतएव वीतरागी गुरु के, चरणो की स्मृति आई है।।
जलधारा करने से शायद, इच्छाओं की उपशान्तीं हो।
उन तृषा परीषहजयी गुरु की, पूजा से सुख प्राप्ती हो।।

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ॐ ह्रीं आचार्यश्रीवीरसागरमुनीन्द्राय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं निर्वपामीति स्वाहा।

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चालीसा


आचार्य श्री वीरसागर चालीसा

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-आर्यिका चंदनामती


।। शंभु छन्द ।।


श्री देवशास्त्र गुरु वन्दन कर, पूर्वाचार्यों को नमन करूँ।
श्री कुन्दकुन्द की परम्परा में, शान्ति सिन्धु को नमन करूँ।।
उन प्रथम शिष्य पट्टाधिपती, आचार्य वीरसागर जी थे।
प्रभु महावीर के लघुनन्दन, छत्तिस गुण रत्नाकर ही थे।।१।।

।। दोहा ।।

गुरु चरणों में नमन कर, करूँ सदा गुणगान।
चालीसा का पठन कर, लहूँ आत्मविज्ञान।।२।।

।। चौपाई ।।

जय हो नग्न दिगम्बर मुनिवर, सत्यपंथ के धारक गुरुवर।।१।।

बिन बोले शिवपथ बतलाते, काया से जिनमत दर्शाते।।२।।

ब्रह्मचर्य की महिमा न्यारी, शिशु सम जात रूप अविकारी।।३।।

महाराष्ट्र के ‘‘ईर’’ ग्राम में, सेठ रामसुख के सुधाम में।।४।।

भाग्यवती का भाग्य खुल गया, नगरी का सौभाग्य खिल गया।।५।।

थी आषाढ़ शुक्ल की पूनम, गुरू पूर्णिमा कहें जिसे हम।।६।।

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ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


भारत गौरव गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के

दीक्षित जीवन के 67 चातुर्मास (1953-2019)

*वर्ष 1953 टिकैत नगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1954 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1955 महेश्वर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1956 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1957 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1958 ब्यावर (राजस्थान)

*वर्ष 1959 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1960 सुजानगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1961 सीकर (राजस्थान)

*वर्ष 1962 लाडनूं (राजस्थान)

*वर्ष 1963 कोलकाता (पश्चिम बंगाल)

*वर्ष 1964 हैदराबाद (आंध्र प्रदेश)

*वर्ष 1965 श्रवणबेलगोला (कर्नाटक)

*वर्ष 1966 सोलापुर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1967 सनावद (मध्य प्रदेश)

*वर्ष 1968 प्रतापगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1969 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1970 टोंक (राजस्थान)

*वर्ष 1971 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1972 दिल्ली (पहाड़ी धीरज)

*वर्ष 1973 दिल्ली (नजफगढ़)

*वर्ष 1974 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1975 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1976 खतौली (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1977 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1978 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1979 दिल्ली (मोरी गेट)

*वर्ष 1980 दिल्ली (कूचा सेठ)

*वर्ष 1981 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1982 दिल्ली (मोदी धर्मशाला)

*वर्ष 1983 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1984 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1985 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1986 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1987 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1988 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1989 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1990 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1991 सरधना (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1992 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1993 अयोध्या (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1994 टिकैतनगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1995 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1996 मांगी तुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1997 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1998 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1999 दिल्ली (कनॉट प्लेस)

*वर्ष 2000 दिल्ली (प्रीत विहार)

*वर्ष 2001 दिल्ली (अशोक विहार)

*वर्ष 2002 प्रयाग इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 2003 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2004 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2005 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2006 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2007 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2008 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2009 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2010 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2011 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2012 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2013 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2014 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2015 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2016 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2017 मुंबई (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2018 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2019 टिकैतनगर (उ.प्र.)

चातुर्मास के विषय में पढ़ें

आज का दिन - २४ अक्टूबर २०१९ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक २४ अक्टूबर,२०१९
तिथी- कार्तिक कृष्ण ११
दिन- गुरुवार
वीर निर्वाण संवत- २५४५
विक्रम संवत- २०७६

सूर्योदय ०६.३०
सूर्यास्त १७.५२


अथ कार्तिक मास फल विचार


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पूज्य गणिनी ज्ञानमती माताजी की 86वीं महाजयंती के प्रतिदिन की फोटोज


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