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पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ जम्बूद्वीप हस्तिनापुर में विराजमान है ।

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें जिनाभिषेक एवं शांतिधारा पुन: ज्ञानमती माताजी - चंदनामती माताजी के प्रवचन ।

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आचार्यश्री प्रसन्नसागर जी


आचार्यश्री प्रसन्नसागर जी जम्बुद्वीप में विराजमान हैं |
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प्रवचन
स्वाध्याय कक्ष


भक्तामर स्तोत्र
श्लोक नं -२२

प्रतिदिन प्रातः ६-७ बजे तक पारस चॅनेल के माध्यम से परम पूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी के द्वारा भक्तामर स्तोत्र का अध्ययन कराया जा रहा है, जिसमें पूज्य माताजी स्तोत्र का उच्चारण एवं अर्थ दोनों का ज्ञान हमें प्रदान कर रही हैं। अत: आप सभी इस क्लास का लाभ लेकर अपने ज्ञान को बढ़ाएं ।
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The True Stories of Jainism


Basic Knowledge of Jainism


आचार्य शांतिसागर मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष 2019-2020


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4 वर्ष 9 महीने की निर्जरा जैन द्वारा धर्म प्रभावना
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शांति भक्ति


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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कुण्डलपुर के राजकुमार महावीर (नाटिका)


कुण्डलपुर के राजकुमार महावीर

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कुण्डलपुर नगर का दृश्य है। खूब सजी हुई नगरी दिखाएँ। सब तरफ पुष्प, रत्न आदि बिखरे हुए हैं। नगरवासी सब बड़ी प्रसन्नमुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। जगह-जगह पर लोग बैठे हंस-हंसकर बातें कर रहे हैं। तभी उस नगर में किसी दूसरी नगरी से एक व्यक्ति आता है और उस नगर की शोभा को देख-देखकर अचम्भित हो रहा है-

व्यक्ति - हे भगवान् ! मैं यह कहाँ आ गया? कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ?

कुण्डलपुरवासी - कहो भाई! तुम कहाँ से आए हो? और इतने आश्चर्यचकित क्यों हो रहे हो?

व्यक्ति - भाई! मैं बहुत दूर से आया हूँ और इस नगर की स्वर्ग जैसी शोभा को देख-देखकर बहुत हैरान हूँ। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि.....

कुण्डलपुरवासी -(बीच में बात काटते हुए) समझाता हूँ, समझाता हूँ, भैया! तुम इतनी चिन्ता काहे को करते हो? चलो, कहीं बैठकर बात करते हैं। (दोनों पास ही एक पेड़ के नीचे बैठकर वार्तालाप करते हैं)-

व्यक्ति - हाँ भाई! अब बताओ, इस नगरी की सुन्दरता का क्या राज है?

कुण्डलपुरवासी - सुनो! यहाँ के राजा सिद्धार्थ हैं न! उनकी महारानी त्रिशला ने जिस दिन से गर्भ धारण किया है उसके छह महीने पहिले से यहाँ रोज खूब रतन बरसते हैं।

व्यक्ति -(आश्चर्य से) अच्छा! तो ये बात है!

(तभी कई नर-नारी झूमते-नाचते हुए आते हैं और कुण्डलपुर के राजा सिद्धार्थ की जय-जयकार करते हैं-)

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विषापहार विधान


विषैले कोरोना वाइरस से बचने के लिए जैन मंदिरों में विषापहार विधान अधिक से अधिक संख्या में करें, इस स्तोत्र के प्रभाव से धनञ्जय कवि ने अपने पुत्र पर चढ़े सर्प के विष को नष्ट करके उसकी जान बचाई थी |

स्तोत्र


महामृत्युंजय स्तोत्र

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तीन लोक का हर प्राणी जिनके चरणों में झुकता है ।
तीन लोक का अग्रभाग जिनकी पावनता कहता है।।
जन्म मृत्यु से रहित नाथ वे मृत्युञ्जयि कहलाते हैं।
मृत्युञ्जयि प्रभु के वन्दन से जन्म मृत्यु नश जाते हैं।।
१।।
जिसने जन्म लिया है जग में मृत्यू उसकी निश्चित है।
इसी जन्ममृत्यू के कारण सारे प्राणी दुक्खित हैं।।
जन्म समान न दुख कोई अरु मरण सदृश नहिं भय जग में।
जान ले यदि संभावित मृत्यू अर्धमृतक नर हों सच में।।२।।

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समवसरण विंशतिका


समवसरण विंशतिका

-प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी

-दोहा-

सरस्वती लक्ष्मी जहाँ, नितप्रति करें प्रणाम।
पुण्यमयी उस धाम का, समवसरण है नाम।।

समवसरण का स्वरूप
छंद-विष्णुपद (कहाँ गये चक्री-बारहभावना)
जहाँ पहुँचते ही दर्शक का पाप शमन होता।
जहाँ पहुँचते ही मानी का मान गलन होता।।
सबको शरण प्रदाता वह ही समवसरण माना।
जिनवर की उस धर्मसभा को नमूँ परमधामा।।१।।

समवसरण के स्वामी
तीर्थंकर प्रभु तप करके बनते केवलज्ञानी।
वे ही बन अरिहंत कहाते समवसरण स्वामी।।
इन्द्राज्ञा से धनकुबेर रचता इक धर्मसभा।
नमूँ उसे नश जाती जिससे भव की पूर्ण व्यथा।।२।।

मानस्तंभ का महत्व
समवसरण की चार दिशा में मानस्तंभ बने।
जिनवर से बारह गुणिते ऊँचे अप्रतिम घने।।
मुख्यद्वार में जाते ही उनका दर्शन होता।
नमूँ वही मानस्तंभ जहाँ मिथ्यात्व वमन होता।।३।।

चैत्यप्रासाद भूमि
प्रथम कोट जो धूलिसाल उससे आगे भूमी।
चैत्यभवन एवं महलों से सहित प्रथम भूमी।।
देव मनुज क्रीड़ा करते वहाँ जाते पुण्यात्मा।
जिनप्रतिमा युत चैत्य भूमि को नमें महानात्मा।।४।।

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ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


भारत गौरव गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के

दीक्षित जीवन के 67 चातुर्मास (1953-2019)

*वर्ष 1953 टिकैत नगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1954 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1955 महेश्वर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1956 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1957 जयपुर (खानिया)

*वर्ष 1958 ब्यावर (राजस्थान)

*वर्ष 1959 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1960 सुजानगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1961 सीकर (राजस्थान)

*वर्ष 1962 लाडनूं (राजस्थान)

*वर्ष 1963 कोलकाता (पश्चिम बंगाल)

*वर्ष 1964 हैदराबाद (आंध्र प्रदेश)

*वर्ष 1965 श्रवणबेलगोला (कर्नाटक)

*वर्ष 1966 सोलापुर (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1967 सनावद (मध्य प्रदेश)

*वर्ष 1968 प्रतापगढ़ (राजस्थान)

*वर्ष 1969 जयपुर (राजस्थान)

*वर्ष 1970 टोंक (राजस्थान)

*वर्ष 1971 अजमेर (राजस्थान)

*वर्ष 1972 दिल्ली (पहाड़ी धीरज)

*वर्ष 1973 दिल्ली (नजफगढ़)

*वर्ष 1974 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1975 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1976 खतौली (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1977 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1978 हस्तिनापुर (प्राचीन मंदिर)

*वर्ष 1979 दिल्ली (मोरी गेट)

*वर्ष 1980 दिल्ली (कूचा सेठ)

*वर्ष 1981 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1982 दिल्ली (मोदी धर्मशाला)

*वर्ष 1983 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1984 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1985 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1986 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1987 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1988 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1989 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1990 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1991 सरधना (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1992 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1993 अयोध्या (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1994 टिकैतनगर (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 1995 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1996 मांगी तुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 1997 दिल्ली (लाल मंदिर)

*वर्ष 1998 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 1999 दिल्ली (कनॉट प्लेस)

*वर्ष 2000 दिल्ली (प्रीत विहार)

*वर्ष 2001 दिल्ली (अशोक विहार)

*वर्ष 2002 प्रयाग इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)

*वर्ष 2003 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2004 कुंडलपुर-नालंदा (बिहार)

*वर्ष 2005 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2006 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2007 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2008 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2009 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2010 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2011 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2012 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2013 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2014 हस्तिनापुर (जंबूद्वीप)

*वर्ष 2015 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2016 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2017 मुंबई (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2018 मांगीतुंगी (महाराष्ट्र)

*वर्ष 2019 टिकैतनगर (उ.प्र.)

चातुर्मास के विषय में पढ़ें

आज का दिन - २८ मार्च २०२० (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक २८ मार्च २०२०
तिथी- चैत्र शुक्ल ४
दिन- शनिवार
वीर निर्वाण संवत- २५४६
विक्रम संवत- २०७७

सूर्योदय ०६.२७
सूर्यास्त १८.३७


अथ चैत्र मास फल विचार

लब्धिविधान व्रत पूर्ण

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