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परम पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का 16/12/2018 रविवार को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में होगा मंगल प्रवेश ।

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*महामहिम राष्ट्रपति जी ऋषभदेवपुरम्-मांगीतुंगी में*
22 अक्टूबर 2018
प्रमुख विषय


जैन धर्म· चौबीस तीर्थंकर भगवान· णमोकार महामंत्र· स्वाध्याय करें· गैलरी· जिनेन्द्र भक्ति· जैन तीर्थ ·



ज्योतिष-वास्तु एवं मंत्र विद्या· जैन भूगोल· जैन इतिहास· श्रावक संस्कार· ग्रन्थ भण्डार

विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन की फ्लशिंग न्यूज़



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विश्वशांति अहिंसा सम्मलेन की झलकियां


सन्त मिलन


।।मंगल प्रवेश एवं सन्त मिलन ।।

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  • चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शान्तिसागरजी की अक्षुण परम्परा के वर्तमान सप्तम पट्टाचार्य चारित्र शिरोमणि श्री अनेकांतसागरजी चतुर्विध संघ एवं गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का ०५-१२-२०१८ को श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर मल्हारगंज इंदौर में मंगल प्रवेश होकर धर्म सभा सम्पन हुई |
  • आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज की शिष्या आर्यिका १०५ आदर्श मति माताजी ससंघ पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के दर्शन हेतु मोदीजी की नसिया (इंदौर) में ०६-१२-२०१८ को हुआ मंगल मिलन |
भगवान ऋषभदेव इंटरनेशनल अवार्ड


जन्मजयन्ती पर प्रस्तुत-


स्वर्णिम व्यक्तित्व की धनी ज्ञानमती माताजी

लेखिका - आर्यिका चन्दनामती
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कुन्दकुन्दान्वयो जीयात्, जीयात् श्री शांतिसागर:।

जीयात् पट्टाधिपस्तस्य, सूरि: श्री वीरसागर:।।
श्री ब्राह्मी गणिनी जीयात्, जीयादन्तिमचन्दना।

जीयात् ज्ञानमती माता, गणिन्यां प्रमुखा कलौ।।

जैनशासन के वर्तमान व्योम पर छिटके नक्षत्रों में दैदीप्यमान सूर्य की भाँति अपनी प्रकाश-रश्मियों को प्रकीर्णित कर रहीं पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर उठी लेखनी की अपूर्णता यद्यपि अवश्यंभावी है, तथापि आत्मकल्याण की भावना से पूज्य माताजी के श्रीचरणों में उनके दीर्घकालीन त्यागमयी जीवन के प्रति विनम्र विनयांजलिरूप मेरा यह विनीत प्रयास है।

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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी


सम्यग्ज्ञान पत्रिका


आगमदर्पण


श्री ज्ञानमती स्तुति:


गणिनीप्रमुख आर्यिकारत्न श्री ज्ञानमती स्तुति:

डॉ. पं. दामोदर जी शास्त्री, दिल्ली
छंद—शार्दूलविक्रीडित

यस्या आप्तजिनोक्तधर्मविषया श्रद्धा दृढा कीत्र्यते,
यज्ज्ञानं बहुशास्त्रवारिधि—तलस्र्पिश प्रसिद्धं भुवि।
चारित्रं च यदीयमस्ति विमलं तीर्थंकराज्ञानुगम् ,
भक्त्याहं प्रणमामि लोकमहितां तां ज्ञाज्ञमत्र्याियकाम्।।१।।

शास्त्राधीति परप्रबोधककथा व्याख्यानरूपादिभि:,
स्वाध्याय प्रमुखैस्तपोभिरखिलै: सच्चर्यया पूतया।
नित्यं स्वात्महिते रताऽपि कुरुते भव्योपकारं च या,
भक्त्याहं प्रणमामि लोकमहितां तां ज्ञानमत्र्याियकाम्

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पलकें बिछाये इंतज़ार


अवध की जनता अपनी युगश्रेष्ठ गुरुमाँ का पलकें बिछाये इंतज़ार कर रही है...

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गुरुमाँ के चरणों में समर्पित अवध के भक्तों की कुछ पंक्तियाँ
मंगल विहार 2018


🚂🚌चलो भोपाल चलो भोपाल🚌🚂
‼भव्य मंगल अगवानी ‼

गुरुभक्तो की धर्मनगरी भोपाल जहां है अतिशयकारी तीर्थ

  • पूर्व में भोजपुर वाले शांति कुन्थु अरहनाथ
  • पश्चिम में झिरनो वाले बड़े बाबा आदिनाथ,नेमिनाथ
  • उत्तर में कुराना वाले बड़े बाबा आदिनाथ
  • दक्षिण में समसगढ़ वाले शांति कुन्थु अरहनाथ
ऐसी धर्मभूमि पर प्रथम बार होने जा रहा है... विश्व की सर्वोच्च जैन साध्वी,माँ जिनवाणी को जन जन तक पहुचानें वाली,अनेको तीर्थो की उद्धारक परम् पूज्य आर्यिकाश्री 105 ज्ञानमती माताजी ससंघ का प्रथम भव्य मंगल आगमन

रविवार दिनाँक 16 दिसम्बर 2018

!! प्रातः 8:00 बजे !!
!! श्री नेमिनाथ दिग.जैन मंदिर स्टेट बैंक चौराहा झिरनो पर अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर आर्यिकासंघ की करें भव्य मंगल अगवानी !!

!! आर्यिका संघ को अगवानी कर चौक जैन मंदिर लाया जाएगा जहाँ सावरकर चौक में विशाल धर्मसभा सम्पन्न होगी !!

भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ


भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष मनाएँ

(चैत्र कृ. नवमी-१० मार्च २०१८ से चैत्र कृ. नवमी-२९ मार्च २०१९)
प्रेरणा-भारतगौरव दिव्यशक्ति शारदे माँ गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
        
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आज हम सभी वर्तमान विश्व में उपस्थित आतंकवाद, हिंसा, विनाश, अशांति, परस्पर शत्रुता, विद्वेष, बदला लेने की भावना आदि विकृतियों से ग्रसित हो रही मानवता को दृष्टिगत कर रहे हैं। ‘अहिंसामयी शाश्वत धर्म’ का शीतल जल ही इन अग्नि ज्वालाओं के उपशमन में सहयोगी हो सकता है, यही तीर्थंकर भगवन्तों की सदाकाल से देशना रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से की गई धर्माराधना, मंत्रानुष्ठान, विधि-विधान भी सम्पूर्ण वातावरण को प्रभावित करके क्षेम-सुभिक्ष-शांति-सौहार्द की स्थापना करने में अत्यन्त कार्यकारी होते हैं, यह परम सत्य है।

      इन्हीं विश्वकल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत होकर भारतगौरव, दिव्यशक्ति, परम उपकारी परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ऋषभगिरि-मांगीतुंगी में विराजमान विश्व के सर्वाधिक उत्तुंग १०८ फुट भगवान ऋषभदेव के श्रीचरणों में स्थित होकर भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती, चैत्र कृ. नवमी, १० मार्च २०१८ के पावन अवसर पर ‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति वर्ष’ मनाने की प्रेरणा प्रदान की है, जो आने वाली ऋषभ जयंती, चैत्र कृ. नवमी, २९ मार्च २०१९ तक हम सबको व्यक्तिगत शांति, सामाजिक शांति, राष्ट्रीय शांति एवं विश्वशांति हेतु जागृत होकर अपना-अपना योगदान प्रदान करने हेतु कटिबद्ध कर रहा है। आइये हम भी विश्वशांति के इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में अपना सहयोग प्रदान कर पुण्यलाभ प्राप्त करें।

विश्वशांति वर्ष मनाने की रूपरेखा-

(१) विश्वशांति हेतु जाप्य (मंत्र-ॐ ह्रीं विश्वशांतिकराय श्री ऋषभदेवाय नम:)
(२) भगवान ऋषभदेव मण्डल विधान
(३) णमोकार महामंत्र अथवा भक्तामर महास्तोत्र का अखण्ड पाठ (अपने समयानुसार)
(४) भगवान ऋषभदेव पर संगोष्ठी

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काव्य कथानक


माता मोहिनी और पुत्री मैना का संवाद

तर्ज-बार-बार तोहे क्या समझाऊँ.......

माता मोहिनी - बार-बार समझाऊँ बेटी, मान ले मेरी बात।
तेरे जैसी सुकुमारी की, दीक्षा का युग है न आज।।
मैना - भोली भाली माता मेरी, सुन तो मेरी बात।
हम और तुम मिलकर ही, युग को बदल सकते आज।।
माता मोहिनी - तूने तो बेटी अब तक, संसार न कुछ देखा है।
फिर भी मान लिया क्यों इसको, यह सब कुछ धोखा है।।
खाने और खेलने के दिन, क्यों करती बर्बाद।
तेरे जैसी सुकुमारी की, दीक्षा का युग है न आज।।१।।

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पुष्पगिरि में माता जी


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सोनकच्छ-मेहतवाड़ा एवं जावर में माताजी


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ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास


ज्ञानमती माताजी के चातुर्मास

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आज का दिन - १६ दिसम्बर २०१८ (भारतीय समयानुसार)


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दिनाँक १६ दिसम्बर,२०१८
तिथी- मार्गशीर्ष शुक्ल ९
दिन-रविवार
वीर निर्वाण संवत- २५४५
विक्रम संवत- २०७५

सूर्योदय ०७.१०
सूर्यास्त १७.२२


अथ मार्गशीर्ष मास फल विचार


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अयोध्या विहार 2018


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