Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


डिप्लोमा इन जैनोलोजी कोर्स का अध्ययन परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी द्वारा प्रातः 6 बजे से 7 बजे तक प्रतिदिन पारस चैनल के माध्यम से कराया जा रहा है, अतः आप सभी अध्ययन हेतु सुबह 6 से 7 बजे तक पारस चैनल अवश्य देखें|

१८ अप्रैल से २३ अप्रैल तक मांगीतुंगी सिद्धक्ष्रेत्र ऋषभदेव पुरम में इन्द्रध्वज मंडल विधान आयोजित किया गया है |

२५ अप्रैल प्रातः ६:४० से पारस चैनल पर पूज्य श्री ज्ञानमती माताजी के द्वारा षट्खण्डागम ग्रंथ का सार प्रसारित होगा |

रत्नों की खान-आर्यिका श्री रत्नमती माताजी

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


रत्नों की खान-आर्यिका श्री रत्नमती माताजी

रचयित्री-ब्र. कु. सारिका जैन (संघस्थ)
इस पुरुषप्रधान देश का मस्तक, नारी से ही ऊँचा है।

नारी ने अपनी निश्छलता से, सबके मन को जीता है।।
सीता-सोमा-मैनासुन्दरि अरु मनोवती जैसी सतियाँ।
जिनकी आदर्शकथाओं को, पढ़ने में बीत जाएँ सदियाँ।।१।।

यहाँ वर्तमान की इक गौरवशाली नारी की बात सुनो।
जो ज्ञानमती जी की जननी, यह सर्वश्रेष्ठ परिचय मानो।।
माँ मोहिनि ने क्रम-क्रम से तेरह, सन्तानों को जन्म दिया।
सबके प्रति अपने कर्तव्यों का, भलीभांति निर्वहन किया।।२।।

थी तेरह वर्ष की आयु शेष तब, धर्मसिन्धु सूरीवर से।
अजमेर नगर में दीक्षा ली, सन् उन्निस सौ इकहत्तर में।।
तेरह प्रकार के चारित को, तेरह वर्षों तक पाला था।
इनकी अतिदृढ़ता ने सबको, आश्चर्यचकित कर डाला था।।३।।

तेरह रत्नों की खान ‘आर्यिका रत्नमती’ जी को वन्दन।
इनके आदर्शमयी जीवन को, करूँ सहस्रों बार नमन।।
इनके उपकारों को यह धरती, भूल कभी ना पाएगी।
हैं जब तक सूर्य-चन्द्र तारे, तब तक इनका यश गाएगी।।४।।

श्री शांतिनाथ भगवन् से मेरी, ये ही एक प्रार्थना है।
ये शीघ्र मुक्ति को प्राप्त करें, नहिं कोई और कामना है।।
हर इक नारी के लिए प्रेरणा-दायी इनका जीवन है।
इनके संस्कारों से ही ‘‘सारिका’’, महक रहा मन उपवन है।।५।।